rajasthan lok-geet राजस्थान के प्रमुख लोक गीत यहाँ की जीवंत संस्कृति, प्रेम, वीर रस और रेगिस्तानी जीवन को दर्शाते हैं। प्रमुख गीतों में केसरिया बालम (राज्य गीत), गोरबंद, घूमर, मोमल, कुर्जा, चिरमी, पीपली, सुवटिया और ढोला-मारू शामिल हैं।

राजस्थान के प्रमुख लोक गीत

प्रस्तावना राजस्थान केवल भौगोलिक रूप से मरुस्थल और अरावली की पहाड़ियों का प्रदेश नहीं है, बल्कि यह एक जीवित संग्रहालय है जहाँ की संस्कृति, परंपराएँ और इतिहास यहाँ के कण-कण में गूंजते हैं। इस सांस्कृतिक धरोहर की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति यहाँ के ‘लोकगीत’ हैं। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने एक बार कहा था, “लोकगीत संस्कृति के वो […]

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मध्य प्रदेश राज्य की भौगोलिक स्थिति

मध्य प्रदेश भौगोलिक एवं भू-वैज्ञानिक अध्ययन

1. प्रस्तावना भारत के प्रायद्वीपीय पठार के उत्तरी भाग में स्थित ‘मध्य प्रदेश’, अपनी विशिष्ट भौगोलिक अवस्थिति के कारण वस्तुतः भारत का ‘हृदय स्थल’ (Heartland) कहलाता है। यह राज्य न केवल भौगोलिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से भी भारत का केंद्र बिंदु है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने इस

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राजस्थान की पशु सम्पदा राज्य की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें बकरी, गाय, भैंस और भेड़ प्रमुख हैं, और यह देश की कुल पशुधन का लगभग 10.7% है; राज्य का पशुधन 5.68 करोड़ (2019 की गणना के अनुसार) है, जिसमें बकरियाँ सर्वाधिक (36.70%) हैं, जबकि राज्य पशु चिंकारा (वन्यजीव) और ऊँट (पशुधन) हैं, जो मरुस्थलीय परिस्थितियों के अनुकूल हैं और ग्रामीण आय के मुख्य स्रोत हैं।

राजस्थान की पशु सम्पदा

1. प्रस्तावना एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भारत एक कृषि प्रधान देश है जहाँ पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। कृषि और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक हैं। भारतीय संदर्भ में, पशुधन न केवल आजीविका का साधन है, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण परिवहन और सामाजिक प्रतिष्ठा का भी प्रतीक है। ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: देश में पशुधन

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राजस्थान की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि और पशुपालन है, जिस पर 60-70% आबादी आजीविका के लिए निर्भर है। बाजरा, सरसों और ग्वार उत्पादन में राज्य भारत में अग्रणी है, लेकिन मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भरता के कारण इसे 'मानसून का जुआ' कहा जाता है। राज्य का 25-30% GSDP कृषि से आता है, जिसमें प्रमुख फसलें रबी (गेहूँ, सरसों) और खरीफ (बाजरा, मक्का, ग्वार) हैं।

राजस्थान में कृषि

1. प्रस्तावना एवं भौगोलिक पृष्ठभूमि राजस्थान, क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य है, जिसका कुल क्षेत्रफल 3,42,239 वर्ग किलोमीटर है। यह भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 10.41 प्रतिशत है। राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य की अधिकांश जनसंख्या अपनी आजीविका के

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rajasthan forest map राजस्थान में वन्य जीव एवं जैव-विविधता संरक्षण

राजस्थान में वन्य जीव एवं जैव-विविधता संरक्षण

1. प्रस्तावना राजस्थान, अपनी भौगोलिक विविधता के साथ-साथ समृद्ध वन्य जीवन के लिए भी जाना जाता है। राज्य में वन्य जीवों के संरक्षण का इतिहास और उससे जुड़े वैधानिक प्रावधान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कैलाश सांखला: भारत के ‘टाइगर मैन’ बाघ संरक्षण के क्षेत्र में राजस्थान के कैलाश सांखला का योगदान अविस्मरणीय है। उन्हें ‘टाइगर मैन

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वीर तेजाजी राजस्थान के एक प्रमुख लोकदेवता, गौरक्षक और नागवंशीय जाट योद्धा हैं, जिन्हें शिव का 11वां अवतार माना जाता है। 11वीं सदी में नागौर के खरनाल में जन्मे तेजाजी ने वचन पालन के लिए लाछा गुजरी की गायों को डाकुओं से छुड़ाते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उन्हें 'काला-बाला का देवता' और 'सांपों के देवता' के रूप में पूजा जाता है

राजस्थान के लोकदेवता: वीर तेजाजी

तेजाजी, खड़नाल, पिता-ताहड़जी, माता-रामकुंवरी, पत्नी-पैमल-दे, लीलण (सिंणगारी), परबतसर (नागौर) पशु-मेला, तेजा दशमी (भाद्रपद शुक्ल दशमी)

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श्री देवनारायण जी (Devnarayan ji)राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश में पूजे जाने वाले प्रमुख लोकदेवता हैं, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। गुर्जर समाज के आराध्य देव, देवनारायण जी का जन्म भीलवाड़ा के आसींद में सवाई भोज और साढू माता के घर हुआ था। वे एक महान योद्धा, गौरक्षक और आयुर्वेद के ज्ञाता थे।

राजस्थान के लोकदेवता: श्री देवनारायण जी

देवनारायण जी, पिता-भोजा, माता-सेंदु गूजरी, पत्नी-पीपलदे, फड़ वाचन यंत्र – “जन्तर”, भाद्रपद शुक्ल सप्तमी, आसींद(भीलवाड़ा), लीलागर

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Baba ramdevji बाबा रामदेवजी राजस्थान के एक पूजनीय लोक देवता हैं, जिन्हें 'रामसा पीर' या 'बाबा रामदेव' के नाम से जाना जाता है, जो 14वीं सदी के राजपूत शासक थे और सामाजिक समरसता, समानता के प्रतीक थे, जिन्होंने दलितों के उत्थान और छुआछूत का विरोध किया; उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है

राजस्थान के लोकदेवता: बाबा रामदेवजी

राजस्थान की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरा पर लोकदेवताओं का स्थान सदैव सर्वोपरि रहा है। इनमें ‘पीरों के पीर’ कहे जाने वाले बाबा रामदेवजी न केवल एक अवतारी पुरुष माने जाते हैं, बल्कि वे मध्यकालीन भारत के एक महान समाज सुधारक, क्रांतिकारी विचारक और सांप्रदायिक सौहार्द के सशक्त हस्ताक्षर भी हैं। ऐतिहासिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य में

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पाबूजी राठौड़ (pabuji) राजस्थान के एक महान लोक देवता हैं, जिन्हें 'ऊँटों के देवता' और 'प्लेग रक्षक देवता' के रूप में पूजा जाता है

राजस्थान के लोकदेवता: पाबूजी राठौड़

राजस्थान की वीर-प्रसूता धरा पर लोकदेवताओं का स्थान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, अपितु यह सामाजिक सुधार, वचनबद्धता और पर्यावरण संरक्षण का एक जीवंत इतिहास है। इस परंपरा में ‘पाबूजी राठौड़’ का नाम अत्यंत आदर और श्रद्धा के साथ लिया जाता है। मारवाड़ के राठौड़ वंश में जन्में पाबूजी को ‘गौरक्षक’, ‘वचन-पालक’ और

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गोगाजी gogaji राजस्थान के एक प्रसिद्ध लोक देवता और योद्धा-संत हैं, जिन्हें 'सांपों के देवता' के रूप में भी पूजा जाता है।

राजस्थान के लोकदेवता : गोगाजी

राजस्थान की संस्कृति में ‘पंच पीरों’ का स्थान सर्वोपरि है। जनमानस में प्रचलित कहावत “पाबू, हड़बू, रामदे, मांगलिया मेहा। पांचू पीर पधारज्यों, गोगाजी जेहा॥” के अनुसार, गोगाजी चौहान को इन पंच पीरों में प्रमुख स्थान प्राप्त है। गोगाजी न केवल एक ऐतिहासिक महापुरुष थे, बल्कि वे सांप्रदायिक सद्भाव के एक अनूठे प्रतीक भी हैं, जिन्हें

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