धारा 209 BNS VS धारा 174A IPC: धारा 82 CrPC (भगोड़ा घोषित व्यक्ति) के अधीन उपस्थिति न होना

सजा (Punishment)

कठोर या सादा

संज्ञेय (Cognizable)

संज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

गैर-जमानती

समझौता योग्य (Compoundable

गैर-शमनीय

विचारणीय न्यायालय (Court)

प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट (Magistrate First Class)

IPC (पुराना कानून)

धारा 174A

जो कोई CrPC 1973 की धारा 82(1) (उद्घोषणा) के अधीन नियत स्थान और समय पर उपस्थित होने में विफल रहेगा… (3 वर्ष का कारावास)। यदि धारा 82(4) के तहत ‘घोषित अपराधी’ (Proclaimed Offender) घोषित किया जा चुका हो… (7 वर्ष का कारावास)।

BNS (नया कानून)

धारा 209

जो कोई BNSS (CrPC) की धारा 84(1) के अधीन उद्घोषणा के अनुपालन में उपस्थित होने में विफल रहेगा… (3 वर्ष)। यदि वह धारा 84(4) के तहत ‘घोषित अपराधी’ हो गया है, तो 7 वर्ष।

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

यह बहुत गंभीर धारा है। जब कोई मुजरिम लंबे समय तक फरार रहता है, तो कोर्ट उसे 'भगोड़ा' (Proclaimed Offender/PO) घोषित कर देती है। यदि वह कोर्ट के अल्टीमेटम (30 दिन) के बाद भी हाजिर नहीं होता, तो उस पर BNS 209 (IPC 174A) के तहत अलग से (जुर्म से अलग) 7 साल की जेल का केस दर्ज होता है।

तुलना

Proclaimed Offender (PO) के लिए कठोर सजा। CrPC 82 अब BNSS 84 हो गई है।

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