धारा 302 BNS VS धारा 295A IPC: विमर्शित और विद्वेषपूर्ण कार्य जो किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से किए गए हों

सजा (Punishment)

कठोर या सादा

संज्ञेय (Cognizable)

संज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

गैर-जमानती

समझौता योग्य (Compoundable

गैर-शमनीय

विचारणीय न्यायालय (Court)

प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट

IPC (पुराना कानून)

धारा 295A

जो कोई विमर्शित और विद्वेषपूर्ण आशय (Deliberate & malicious intent) से… किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को उसके धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान (Insult) करके आहत करेगा… (लिखित, उच्चारित शब्दों या संकेतों द्वारा)… 3 वर्ष।

BNS (नया कानून)

धारा 302

जो कोई विमर्शित और विद्वेषपूर्ण आशय से भारत के नागरिकों के किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को उसके धर्म का अपमान करके आहत करेगा… (3 वर्ष या जुर्माना या दोनों)।

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

हेट स्पीच / धार्मिक भावनाओं को भड़काना (Hate Speech/Blasphemy)! यह भारत का 'ईशनिंदा' (Blasphemy) क़ानून है। यदि कोई नेता, यूट्यूबर या लेखक जानबूझकर और বিদ্বेषभाव (Malicious intent) से सोशल मीडिया या टीवी पर किसी देवी-देवता या पैगंबर को जमकर गालियां देता है, ताकि दंगा भड़के (Outraging religious feelings)। ऐसे मामलों में BNS 302 (IPC 295A) लगती है और यह 3 साल की 'गैर-जमानती' (Non-Bailable) सजा वाला अपराध है।

तुलना

हेट स्पीच (Hate Speech) और धार्मिक उकसावे के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली (और चर्चित) धारा ‘295A’, अब BNS में ‘302’ हो गई है (ध्यान दें, BNS 302 अब हत्या नहीं है!)।

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