धारा 334(1-2) BNS बनाम धारा 459-460 IPC: रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार में घोर उपहति (Grievous hurt) या मृत्यु (Death)

सजा (Punishment)

आजीवन कारावास / मृत्यु दंड / 10 वर्ष

संज्ञेय (Cognizable)

संज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

गैर-जमानती

समझौता योग्य (Compoundable

गैर-शमनीय

विचारणीय न्यायालय (Court)

सेशन कोर्ट

IPC (पुराना कानून)

धारा 459-460

459: यदि रात्रौ छुपकर घुसने या गृह-भेदन करते समय कोई व्यक्ति किसी को ‘घोर उपहति’ (Grievous hurt) कारित करे… (उम्रकैद या 10 वर्ष)। 460: रात में गृह-भेदन करने वाले व्यक्तियों में से (भले ही लोग ज्यादा हों) यदि ‘कोई एक’ मृत्यु या घोर उपहति कारित करे, तो ‘सभी’ (All persons jointly) को उम्रकैद या 10 वर्ष की सज़ा।

BNS (नया कानून)

धारा 334(1), 334(2)

334: रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार… में घोर उपहति या मृत्यु। (1) घोर उपहति कारित करने पर (उम्रकैद या 10 वर्ष)। (2) संयुक्त दायित्व (Joint liability) – यदि 2 या अधिक हों और कोई एक व्यक्ति मृत्यु या घोर उपहति कर दे, तो सभी को मृत्यु (Death), आजीवन कारावास, या 10 वर्ष का दंड।

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

सेंधमारी के दौरान मर्डर! (Death during House-breaking)। अगर रात को सेंधमारी करने वाले चोरों को मालिक जागकर पकड़ ले। और हाथापाई में कोई एक चोर मालिक को 'चाकू मारकर घायल' (Grievous Hurt) कर दे (IPC 459)। या फिर चोरों की गैंग में से सिर्फ कोई एक चोर गोली चला दे और मालिक की मौत हो जाए, तो 'संयुक्त दायित्व' (Joint Liability) के नियम (IPC 460) के कारण गैंग के 'सभी चोर' हत्या के मुजरिम माने जाएंगे। बड़ा बदलाव: नए BNS 334(2) में ऐसे 'सेंधमारी के दौरान मर्डर' में 'फांसी (Death Penalty)' का कड़ा प्रावधान भी जोड़ दिया गया है।

तुलना

Major Addition (Death Penalty): पुरानी IPC 460 में सेंधमारी के दौरान हत्या होने पर अधिकतम सजा ‘उम्रकैद’ थी। लेकिन नए कानून BNS 334(2) ने इसे और कठोर बनाते हुए ‘मृत्यु दंड (Death Penalty)‘ का खंड भी शामिल कर दिया है। यह एक बहुत बड़ा कानूनी परिवर्तन है।

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