धारा 336(5) BNS बनाम धारा 468 IPC: छल (Cheating) के प्रयोजन से कूटरचना
सजा (Punishment)
कठोर या सादा
संज्ञेय (Cognizable)
संज्ञेय (Cognizable)
जमानतीय (Bailable)
गैर-जमानती (Non-Bailable)
समझौता योग्य (Compoundable
गैर-शमनीय (Non-Compoundable)
विचारणीय न्यायालय (Court)
प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
IPC (पुराना कानून)
धारा 468
जो कोई इस आशय से कूटरचना (Forgery) करेगा कि कुटरचित दस्तावेज़ (Forged document) का उपयोग ‘छल (Cheating)’ के प्रयोजन से किया जाए… 7 वर्ष की अवधि के कारावास से, और जुर्माने से दंडनीय होगा।
BNS (नया कानून)
धारा 336(5)
336(5): जो कोई इस आशय से कूटरचना करेगा कि… उपयोग छल के प्रयोजन से किया जाए… 7 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दंडित।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
धोखाधड़ी के लिए फर्ज़ी डाक्यूमेंट्स बनाना! (Forgery for Cheating)। मान लीजिए 'A' ने बैंक से 10 लाख का लोन लेने के लिए अपनी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) और सैलरी स्लिप 'फ़र्ज़ी (Fake)' बना ली। यहाँ उसने 'छल' (Cheating 420) करने के लिए 'जालसाज़ी' (Forgery) का सहारा लिया है। ऐसे केस में पुलिस FIR में 420 के साथ-साथ IPC 468 (नया BNS 336-5) भी लगाती है। इसमें भी 7 साल की कठोर सज़ा होती है और यह 'गैर-जमानती' अपराध है।
तुलना
अक्सर पुलिस 420, 467, 468 की धाराओं की तिकड़ी ‘धोखाधड़ी और जालसाज़ी’ के मुकदमों में एक साथ लगाती है। BNS में यह सब अब 318 और 336 के तहत आ गए हैं। 7 साल की सज़ा पूर्ववत है।