धारा 356 BNS बनाम धारा 499-500 IPC: मानहानि (Defamation) की परिभाषा व दंड
सजा (Punishment)
सादा कारावास या सामुदायिक सेवा
संज्ञेय (Cognizable)
असंज्ञेय (Non-cognizable - सीधे कोर्ट में कंप्लेंट)
जमानतीय (Bailable)
जमानती (Bailable)
समझौता योग्य (Compoundable
शमनीय
विचारणीय न्यायालय (Court)
प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
IPC (पुराना कानून)
धारा 499, 500
BNS (नया कानून)
धारा 356(1), 356(2)
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
किसी की इज्ज़त/प्रतिष्ठा (Reputation) खराब करना! (Defamation)। अगर आप अखबार में, टीवी पर, या आज के दौर में 'फेसबुक/ट्विटर (Social Media)' पर किसी शरीफ व्यक्ति/नेता के खिलाफ झूठा लेख (Post) लिखते हैं कि 'वह चोर है' या 'भ्रष्ट है', जिससे समाज में उसकी इज्जत (Reputation) गिर जाए। तो वह व्यक्ति आप पर IPC 499/500 (नया BNS 356) का 'मानहानि का केस' (Defamation file) कर सकता है। ऐतिहासिक बदलाव: पहली बार नए कानून BNS 356 में 'सामुदायिक सेवा (Community Service)' का दंड जोड़ा गया है। यानी जज सजा के तौर पर कह सकता है 'जाओ 2 महीने अस्पताल में मुफ्त सफाई करो या अनाथालय में पढ़ाओ'। (इसमें अधिकतम 2 साल की जेल होती है)।
तुलना
Major Inclusion of Community Service: मानहानि (Defamation 500) एक Private Injury है। BNS 356(2) ने भारत के दांडिक इतिहास में पहली बार ‘सामुदायिक सेवा (Community Service)’ को एक वैकल्पिक उचित दंड के रूप में जोड़ा है।