अध्याय 24
CrPC Section 301 in Hindi: लोक अभियोजकों द्वारा हाज़िरी
New Law Update (2024)
धारा 338 भा.ना.सु.सं.
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक – अन्वेषण/जांच
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) किसी मामले का भारसाधक लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक किसी लिखित प्राधिकार के बिना ऐसे किसी न्यायालय के समक्ष, जिसमें वह मामला जांच, विचारण या अपील में है, उपस्थित हो सकेगा और अभिवचन कर सकेगा।
(2) यदि किसी ऐसे मामले में कोई प्राइवेट व्यक्ति किसी व्यक्ति का अभियोजन करने के लिए किसी प्लीडर को अनुदेश देता है, तो मामले का भारसाधक लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक अभियोजन का संचालन करेगा और इस प्रकार अनुदेशित प्लीडर लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक के निर्देशों के अधीन उसमें कार्य करेगा और मामले में साक्ष्य बंद होने के पश्चात् न्यायालय की अनुज्ञा से लिखित बहस प्रस्तुत कर सकेगा।
Important Sub-Sections Explained
धारा 301(1)
यह उप-धारा स्पष्ट करती है कि लोक अभियोजकों और सहायक लोक अभियोजकों को जांच, विचारण या अपील के दौरान किसी भी न्यायालय में किसी मामले में उपस्थित होने और बहस करने के लिए किसी लिखित प्राधिकार की आवश्यकता नहीं होती है, जो उनके अंतर्निहित प्राधिकार पर जोर देती है।
धारा 301(2)
यह महत्वपूर्ण प्रावधान यह बताता है कि जहां एक प्राइवेट व्यक्ति किसी व्यक्ति का अभियोजन करने के लिए प्लीडर को अनुदेश दे सकता है, वहीं लोक अभियोजक अभियोजन के समग्र प्रभारी रहता है, और प्राइवेट प्लीडर को उनके निर्देशों के अधीन कार्य करना होगा, केवल साक्ष्य बंद होने के बाद न्यायालय की अनुमति से लिखित बहस प्रस्तुत करना होगा।
Landmark Judgements
शिव कुमार बनाम हुकम चंद (1999):
उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कोई प्राइवेट अधिवक्ता, भले ही पीड़ित द्वारा अनुदेशित हो, अभियोजन का स्वतंत्र प्रभार नहीं ले सकता। उनकी भूमिका लोक अभियोजक की सहायता करना है, उनके निर्देशों के अधीन कार्य करते हुए, और वे केवल न्यायालय की अनुमति से तथा लोक अभियोजक की प्राथमिक भूमिका के अधीन लिखित बहस प्रस्तुत कर सकते हैं या गवाहों की जांच कर सकते हैं।
जे.के. इंटरनेशनल बनाम राज्य, एन.सी.टी. दिल्ली (2001):
इस निर्णय ने दोहराया कि अभियोजन का संचालन करने का प्राथमिक दायित्व लोक अभियोजक का है। शिकायतकर्ता द्वारा एक प्राइवेट अधिवक्ता को नियुक्त करने से उन्हें लोक अभियोजक का स्थान लेने या उसे अधिलंघित करने की अनुमति नहीं मिलती, जिसकी भूमिका अभियोजन का मार्गदर्शन करने में सर्वोपरि रहती है।
Draft Format / Application
[न्यायाधीश का पदनाम, उदा. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सत्र न्यायाधीश] के न्यायालय में
[शहर/जिला], [राज्य]
फौजदारी वाद सं. [XXXX] सन् [YYYY]
के मामले में:
राज्य
बनाम
[अभियुक्त का नाम/नाम]
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 301(2) के तहत लिखित बहस प्रस्तुत करने की अनुमति हेतु आवेदन
अत्यंत विनम्रतापूर्वक निवेदन है:
1. कि उपरोक्त वर्णित फौजदारी वाद वर्तमान में इस माननीय न्यायालय के समक्ष विचारण/जांच अधीन है।
2. कि आवेदक वर्तमान वाद में शिकायतकर्ता/पीड़ित, [शिकायतकर्ता/पीड़ित का नाम], की ओर से विधिवत रूप से अनुदेशित प्राइवेट प्लीडर है।
3. कि वर्तमान वाद में साक्ष्य [साक्ष्य बंद होने की तिथि] को समाप्त हो चुका है।
4. कि न्याय के हित में तथा अभियोजन की प्रभावी सहायता करने के लिए, आवेदक दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 301(2) के प्रावधानों के अनुसार, साक्ष्य बंद होने के पश्चात् लिखित बहस प्रस्तुत करने हेतु इस माननीय न्यायालय की सानुग्रह अनुमति चाहता है।
5. कि लिखित बहस प्रस्तुत करने से इस माननीय न्यायालय को शिकायतकर्ता/पीड़ित के दृष्टिकोण से तथ्यों और विधिक प्रस्तुतियों को समझने में सहायता मिलेगी।
6. कि मामले के भारसाधक लोक अभियोजक को इस आवेदन की सूचना दे दी गई है।
प्रार्थना:
अतः, अत्यंत विनम्रतापूर्वक प्रार्थना है कि यह माननीय न्यायालय, आवेदक को उपरोक्त वर्णित वाद में साक्ष्य बंद होने के पश्चात् लिखित बहस प्रस्तुत करने की अनुमति प्रदान करने की कृपा करें।
और इस दयालुतापूर्ण कार्य के लिए, आवेदक सदैव प्रार्थना करता रहेगा।
दिनांक: [दिनांक]
स्थान: [स्थान]
[प्राइवेट प्लीडर के हस्ताक्षर]
[प्राइवेट प्लीडर का नाम]
शिकायतकर्ता/पीड़ित के अधिवक्ता
[पंजीकरण संख्या]
[संपर्क विवरण]