अध्याय XXIV
CrPC Section 314 in Hindi: मौखिक बहस और बहस का ज्ञापन
New Law Update (2024)
धारा 345 बी.एन.एस.एस.
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक – साक्ष्य / साक्षी
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) किसी कार्यवाही का कोई पक्षकार, अपने साक्ष्य के समाप्त हो जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संक्षिप्त मौखिक बहस कर सकेगा, और यदि कोई मौखिक बहस करता है तो उसे समाप्त करने से पहले, न्यायालय को एक ज्ञापन, संक्षेप में और सुभिन्न शीर्षकों के अधीन, अपने मामले के समर्थन में तर्क प्रस्तुत करते हुए, प्रस्तुत कर सकेगा और ऐसा प्रत्येक ज्ञापन अभिलेख का भाग होगा।
(2) ऐसे प्रत्येक ज्ञापन की एक प्रति साथ ही विरोधी पक्षकार को दी जाएगी।
(3) लिखित बहस दाखिल करने के प्रयोजन के लिए कार्यवाही का कोई स्थगन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि न्यायालय लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों से ऐसा स्थगन देना आवश्यक न समझे।
(4) यदि न्यायालय की राय है कि मौखिक बहस संक्षिप्त या सुसंगत नहीं है, तो वह ऐसी बहसों को विनियमित कर सकेगा।
Important Sub-Sections Explained
धारा 314(1)
यह उपधारा पक्षकारों को सभी साक्ष्य प्रस्तुत होने के पश्चात् संक्षिप्त मौखिक बहस और लिखित ज्ञापन के माध्यम से अपना अंतिम मामला न्यायालय में प्रस्तुत करने का मौलिक अधिकार प्रदान करती है। यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक पक्षकार को न्यायालय के विचारार्थ अपनी स्थिति और तर्कों का सार प्रस्तुत करने का अवसर मिले।
धारा 314(3)
यह महत्वपूर्ण उपधारा यह निर्धारित करती है कि आमतौर पर, लिखित बहस दाखिल करने के उद्देश्य से कोई स्थगन नहीं दिया जाना चाहिए। हालांकि, यदि कोई न्यायालय लिखित रूप में विशिष्ट कारणों को दर्ज करता है तो वह स्थगन प्रदान कर सकता है, विचारणों के समय पर समापन की आवश्यकता पर जोर देते हुए।
Landmark Judgements
नारायण बनाम महाराष्ट्र राज्य, 2018 (4) Mh. L. J. 270:
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने पुष्टि की कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 314 किसी कार्यवाही के पक्षकारों को अपने साक्ष्य समाप्त होने के बाद संक्षिप्त मौखिक बहस करने और बहस का ज्ञापन प्रस्तुत करने का एक मूल्यवान अधिकार प्रदान करती है, जिसे न्यायालय द्वारा मनमाने ढंग से नकारा नहीं जा सकता।
अनिल कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2007) (2) Crimes 104 (All):
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बहस के ज्ञापन के महत्व पर प्रकाश डाला, यह कहते हुए कि यह अभिलेख का एक अभिन्न अंग है और अपीलीय न्यायालयों के लिए विचारण स्तर पर पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत तर्कों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।