अध्याय 29
CrPC Section 373 in Hindi: परिशांति कायम रखने या सदाचार के लिए प्रतिभूति की अपेक्षा करने वाले या प्रतिभू को स्वीकार करने से इनकार करने वाले या अस्वीकृत करने वाले आदेशों से अपील
New Law Update (2024)
धारा 415 बी.एन.एस.एस.
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक – अपीलें/पुनरीक्षण
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) कोई व्यक्ति जिसे धारा 117 के अधीन परिशांति कायम रखने के लिए या सदाचार के लिए प्रतिभूति देने का आदेश दिया गया है; या
(2) कोई व्यक्ति जो धारा 121 के अधीन किसी प्रतिभू को स्वीकार करने से इनकार करने वाले या अस्वीकृत करने वाले किसी आदेश से व्यथित है,
ऐसे आदेश के विरुद्ध सेशन न्यायालय में अपील कर सकेगा:
परंतु इस धारा की कोई बात ऐसे व्यक्तियों को लागू नहीं होगी जिनके विरुद्ध कार्यवाहियां धारा 122 की उपधारा (2) या उपधारा (4) के उपबंधों के अनुसार सेशन न्यायाधीश के समक्ष रखी जाती हैं।
Important Sub-Sections Explained
उपधारा (1) और (2)
ये उपधाराएँ सेशन न्यायालय में अपील करने के प्राथमिक आधारों को परिभाषित करती हैं। उपधारा (1) किसी भी व्यक्ति को, जिसे धारा 117 के तहत परिशांति या सदाचार के लिए प्रतिभूति प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है, अपील करने की अनुमति देती है, जबकि उपधारा (2) धारा 121 के तहत प्रतिभू को स्वीकार करने से इनकार करने या अस्वीकृत करने वाले आदेश से व्यथित व्यक्तियों को अपील का अधिकार प्रदान करती है।
Landmark Judgements
श्रीमती मनोरमा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य (1993):
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 373 के तहत अपील केवल धारा 117 के तहत पारित अंतिम आदेश के विरुद्ध होती है, जिसमें प्रतिभूति की अपेक्षा की गई हो, न कि धारा 111 के तहत जारी प्रारंभिक आदेश के विरुद्ध।
नारायण चंद्र घोष बनाम राज्य (1988):
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 373 के तहत एक सेशन न्यायाधीश की अपीलीय शक्तियों के दायरे पर विस्तार से बताया, जिसमें प्रतिभूति की अपेक्षा करने वाले या प्रतिभू को अस्वीकृत करने वाले आदेश की शुद्धता और वैधता की समीक्षा करने में न्यायाधीश की भूमिका पर जोर दिया गया।