अध्याय XXXII
CrPC Section 440 in Hindi: बंधपत्र की रकम और उसकी कमी
New Law Update (2024)
धारा 483 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता
TRIAL COURT
Punishment
प्रक्रियात्मक – जमानत
Cognizable?
Bailable?
Compoundable?
Bare Act Text
(1) इस अध्याय के अधीन निष्पादित प्रत्येक बंधपत्र की रकम मामले की परिस्थितियों का सम्यक् ध्यान रखते हुए नियत की जाएगी और अत्यधिक नहीं होगी।
(2) उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय यह निदेश दे सकता है कि किसी पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट द्वारा अपेक्षित जमानत कम की जाए।
Important Sub-Sections Explained
धारा 440(1) दंड प्रक्रिया संहिता
यह उपधारा अधिदेशित करती है कि जमानत के लिए बंधपत्र की राशि नियत करते समय, न्यायालयों को मामले की विशिष्ट परिस्थितियों पर विचार करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राशि अत्यधिक उच्च न हो, जिससे इसे दंडात्मक होने या स्वतंत्रता प्राप्त करने में बाधा बनने से रोका जा सके।
धारा 440(2) दंड प्रक्रिया संहिता
यह उपधारा उच्च न्यायालयों, विशेष रूप से उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय को यह शक्ति प्रदान करती है कि वे हस्तक्षेप करें और जमानत राशि में कमी का आदेश दें जो किसी पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट द्वारा नियत की गई हो सकती है।
Landmark Judgements
मोती राम बनाम मध्य प्रदेश राज्य (1978):
उच्चतम न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया कि अत्यधिक जमानत राशि के कारण जमानत से इनकार नहीं किया जाना चाहिए या इसे व्यावहारिक रूप से असंभव नहीं बनाया जाना चाहिए, विशेषकर आर्थिक रूप से वंचित व्यक्तियों के लिए। इसने इस बात पर जोर दिया कि जमानत की राशि मामले की परिस्थितियों का सम्यक् ध्यान रखते हुए नियत की जानी चाहिए और दंडात्मक नहीं होनी चाहिए, जिससे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वतंत्रता के अधिकार को बरकरार रखा जा सके।
संजय चंद्र बनाम सीबीआई (2011):
इस निर्णय ने इस सिद्धांत को पुष्ट किया कि “जमानत एक नियम है, जेल एक अपवाद है” और इस बात पर बल दिया कि जमानत की शर्तें, जिनमें बंधपत्र की राशि भी शामिल है, इतनी भारी या अनुचित नहीं होनी चाहिए कि जमानत देने के मूल उद्देश्य को ही विफल कर दे। न्यायालय ने रेखांकित किया कि मनमानी या अत्यधिक जमानत की शर्तें व्यक्तिगत स्वतंत्रता की भावना का उल्लंघन करती हैं।
Draft Format / Application
मा0 [उच्च न्यायालय/सेशन न्यायाधीश] के न्यायालय में, [शहर], [राज्य]
आपराधिक विविध याचिका संख्या _______ 20XX की
विषय में:
[अभियुक्त/आवेदक का नाम]
पुत्र/पुत्री [पिता का नाम]
लगभग [आयु] वर्ष की आयु,
निवासी [पता]
…आवेदक
बनाम
[राज्य का नाम] राज्य
[पुलिस थाना/जांच एजेंसी का नाम] के माध्यम से
…प्रत्यर्थी
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 440 के तहत जमानत राशि कम करने हेतु आवेदन
विनम्र निवेदन है कि:
1. यह कि आवेदक, पुलिस थाना [पुलिस थाना का नाम] में [भारतीय दंड संहिता/अन्य कानून की संबंधित धाराएं] की धाराओं के तहत दर्ज [मामला संख्या/प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या] में अभियुक्त है, जो वर्तमान में माननीय [जमानत मंजूर करने वाले मजिस्ट्रेट/न्यायाधीश का नाम] के न्यायालय में लंबित है।
2. यह कि माननीय [मजिस्ट्रेट/न्यायाधीश का नाम] ने दिनांक [जमानत आदेश की तारीख] के आदेश द्वारा आवेदक को रुपये [मूल जमानत राशि]/- के योग के व्यक्तिगत बंधपत्र और उतनी ही राशि के एक/दो दिवालिया प्रतिभूति/प्रतिभूतियों के साथ जमानत पर रिहा करने की कृपा की थी। (उक्त जमानत आदेश की एक प्रति इसमें अनुलग्नक ‘ए’ के रूप में संलग्न है)।
3. यह कि माननीय [मजिस्ट्रेट/न्यायाधीश] द्वारा नियत की गई रुपये [मूल जमानत राशि]/- की जमानत राशि अत्यधिक है और आवेदक तथा उसके/उसकी परिवार के सदस्यों की वित्तीय क्षमता से परे है।
4. यह कि आवेदक [पेशा/व्यवसाय का उल्लेख करें, उदा. सामान्य साधन वाला व्यक्ति, दिहाड़ी मजदूर] सीमित आय वाला व्यक्ति है और उसके पास कोई पर्याप्त संपत्ति नहीं है। इतनी अधिक जमानत राशि लगाना प्रभावी रूप से जमानत से इनकार करने के समान है, जिससे भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आवेदक के व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता है।
5. यह कि आवेदक के समुदाय में गहरे संबंध हैं और उसके फरार होने की संभावना नहीं है। वह इस माननीय न्यायालय द्वारा लगाई गई सभी शर्तों का पालन करने का वचन देता/देती है।
6. यह कि दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 440(1) विशेष रूप से प्रावधान करती है कि प्रत्येक बंधपत्र की राशि मामले की परिस्थितियों का सम्यक् ध्यान रखते हुए नियत की जाएगी और अत्यधिक नहीं होगी। इसके अतिरिक्त, धारा 440(2) इस माननीय न्यायालय को यह निदेश देने का अधिकार देती है कि किसी पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट द्वारा अपेक्षित जमानत कम की जाए।
7. यह विनम्रतापूर्वक प्रस्तुत किया जाता है कि वर्तमान मामले की परिस्थितियाँ और आवेदक की वित्तीय स्थिति जमानत राशि में कमी को उचित ठहराती है।
प्रार्थना:
अतः, यह अत्यंत विनम्रतापूर्वक प्रार्थना की जाती है कि यह माननीय न्यायालय कृपा कर के:
a) [मामला संख्या/प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या] में निर्धारित जमानत राशि को रुपये [मूल जमानत राशि]/- से घटाकर एक उचित राशि, अधिमानतः रुपये [प्रस्तावित घटाई गई राशि]/- या ऐसी अन्य राशि जो इस माननीय न्यायालय को उपयुक्त और उचित लगे, करने का निदेश दे;
b) मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में इस माननीय न्यायालय को जो भी अन्य आदेश या निर्देश उपयुक्त और उचित लगे, वह पारित करे।
और इस दयालुता के कार्य के लिए, आवेदक कर्तव्यबद्ध होकर सदैव प्रार्थना करेगा/करेगी।
दिनांक: [दिनांक]
स्थान: [स्थान]
(आवेदक/आवेदक के अधिवक्ता के हस्ताक्षर)
[आवेदक/अधिवक्ता का नाम]
[पंजीकरण संख्या, यदि अधिवक्ता है]