व्याख्या: बलिराम भगत राजस्थान के राज्यपाल के साथ-साथ लोकसभा अध्यक्ष भी रहे हैं।
अ. मंत्री, मुख्यमंत्री के प्रसाद-पर्यन्त पद धारण करेंगे।
ब. राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रसाद-पर्यन्त पद धारण करेंगे।
स. मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से, विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
द. मुख्यमंत्री की पदावधि विधानसभा के कार्यकाल की समवर्ती होती है।
सही कथनों वाले कूट की पहचान कीजिए –
व्याख्या: राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसाद-पर्यन्त पद धारण करते हैं (अनुच्छेद 156) और मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है (अनुच्छेद 164)। मंत्री राज्यपाल के प्रसाद-पर्यन्त पद धारण करते हैं, न कि मुख्यमंत्री के।
व्याख्या: राज्यपाल राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या और सेवा शर्तों को निर्धारित करता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 318 में आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों की सेवा की शर्तों के बारे में नियम बनाने का अधिकार शामिल है।
व्याख्या: राज्यपाल अपने स्वविवेकी कृत्यों को छोड़कर अपने कृत्यों का निर्वहन मंत्रिपरिषद् की सहायता और सलाह से करेगा, जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होता है। यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 163 में उल्लिखित है।
व्याख्या: राजस्थान में राज्यपाल का पद 1 नवम्बर 1956 को सातवें संविधान संशोधन और राज्यों के पुनर्गठन अधिनियम के तहत स्थापित हुआ, जब राजप्रमुख की व्यवस्था समाप्त हो गई।
व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 155 के तहत राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाती है।
व्याख्या: राजस्थान में राजप्रमुख का पद 1949 में स्थापित हुआ और 1 नवम्बर 1956 को सातवें संविधान संशोधन और राज्यों के पुनर्गठन के बाद समाप्त हो गया।
1. वह कोर्ट-मार्शल (सेना न्यायालय) द्वारा सजा के संबंध में माफी या छूट दे सकता है।
2. वह उन विषयों से संबंधित किसी भी कानून के विरुद्ध अपराध के लिए क्षमा, राहत, या सजा को निलंबित कर सकता है, जिस पर राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार है।
व्याख्या: राज्यपाल कोर्ट-मार्शल द्वारा दी गई सजा को माफ नहीं कर सकता। यह शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास है। राज्यपाल केवल राज्य सूची के विषयों से संबंधित अपराधों के लिए क्षमादान दे सकता है।
व्याख्या: जस्टिस जे.एस. वर्मा (जगदीश शरण वर्मा) भारत के 27वें मुख्य न्यायाधीश थे और उन्होंने राजस्थान के राज्यपाल (कार्यवाहक) के रूप में भी कार्य किया।
व्याख्या: संविधान के अनुच्छेद 154(1) के अनुसार, राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी और वह इसका प्रयोग इस संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा करेगा।