धारा 1(3) BNS VS धारा 2 IPC: भारत के भीतर किए गए अपराधों का दंड
सजा (Punishment)
लागू नहीं (अधिकार क्षेत्र)
संज्ञेय (Cognizable)
लागू नहीं
जमानतीय (Bailable)
लागू नहीं
समझौता योग्य (Compoundable
लागू नहीं
विचारणीय न्यायालय (Court)
लागू नहीं
IPC (पुराना कानून)
धारा 2
हर व्यक्ति इस संहिता के उपबंधों के प्रतिकूल हर कार्य या लोप के लिए, जिसका वह भारत के भीतर दोषी होगा, इसी संहिता के अधीन दंडनीय होगा, अन्यथा नहीं।
BNS (नया कानून)
धारा 1(3)
हर व्यक्ति इस संहिता के उपबंधों के प्रतिकूल हर कार्य या लोप के लिए, जिसका वह भारत के भीतर दोषी होगा, इसी संहिता के अधीन दंडनीय होगा, अन्यथा नहीं।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
IPC की धारा 2 जो भारत के भीतर किए गए अपराधों के लिए अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) तय करती थी, अब BNS की धारा 1(3) में समाहित है। इसमें कोई मूलभूत परिवर्तन नहीं है।
IPC धारा 2 और BNS धारा 1(3) की तुलना
| IPC धारा 2 | BNS धारा 1(3) |
|---|---|
| भारत के भीतर किए गए अपराधों का दंड। | समान अधिकार क्षेत्र BNS 1(3) में है। |
कानूनी टिप्पणी
यह भारत की सीमाओं के भीतर किए गए किसी भी अपराध को कवर करता है।