धारा 102 BNS VS धारा 301 IPC: जिस व्यक्ति की मृत्यु कारित करने का आशय था उससे भिन्न व्यक्ति की मृत्यु कारित करके आपराधिक मानव वध
सजा (Punishment)
परिभाषा
संज्ञेय (Cognizable)
संज्ञेय
जमानतीय (Bailable)
गैर-जमानती
समझौता योग्य (Compoundable
गैर-शमनीय
विचारणीय न्यायालय (Court)
सेशन कोर्ट
IPC (पुराना कानून)
धारा 301
यदि कोई व्यक्ति… ऐसा आपराधिक मानव वध ऐसे किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करके करे जिसकी मृत्यु कारित करने का उसका न तो आशय था न वह यह जानता था… तो वह अपराध उसी भांति का होगा मानो उसने लक्षित व्यक्ति की मृत्यु कारित की हो (Transferred Malice)।
BNS (नया कानून)
धारा 102
यदि कोई व्यक्ति… किसी ऐसे व्यक्ति की मृत्यु कारित करे जिसकी मृत्यु कारित करने का उसका आशय नहीं था… तो वह अपराध उसी भांति का होगा मानो उसने लक्षित व्यक्ति की मृत्यु कारित की हो।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
निशाना चूंका, मरा कोई और! (Transferred Malice)। आपने 'A' को मारने के लिए जहर वाला दूध रखा। लेकिन आपका बच्चा 'B' उस दूध को पी गया और मर गया। भले ही आपका इरादा बच्चे को मारने का नहीं था, फिर भी BNS 102 (IPC 301) के सिद्धांत के अनुसार कानून मानेगा कि आपने 'B' का ही मर्डर किया है और आपको खून की ही सजा मिलेगी।
तुलना
यह ‘Transferred Intent’ (स्थानांतरित आशय) का महत्त्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत है।