धारा 103 BNS VS धारा 302 IPC: हत्या (Murder) के लिए दंड
सजा (Punishment)
कठोर या सादा
संज्ञेय (Cognizable)
संज्ञेय
जमानतीय (Bailable)
गैर-जमानती
समझौता योग्य (Compoundable
गैर-शमनीय
विचारणीय न्यायालय (Court)
सेशन कोर्ट
IPC (पुराना कानून)
धारा 302
जो कोई हत्या (Murder) करेगा, वह मृत्यु दंड (Death) या आजीवन कारावास (Imprisonment for life) से दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।
BNS (नया कानून)
धारा 103
103(1): जो कोई हत्या करेगा वह मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा। 103(2): (Mob Lynching) जब 5 या अधिक व्यक्तियों का समूह मूलवंश, जाति, समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा आदि के आधार पर हत्या करेगा तो प्रत्येक सदस्य को मृत्यु या आजीवन कारावास… से दंडित किया जाएगा।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
फांसी या उम्रकैद! (Punishment for Murder)। 'दफा 302' भारत की सबसे मशहूर लीगल टर्म थी। अब यह BNS 103 हो गई है। अगर अदालत में साबित हो गया कि मुजरिम ने मर्डर किया है, तो जज के पास सिर्फ दो ही विकल्प होते हैं- या तो ताउम्र जेल की चक्की (उम्रकैद) या सबसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मामले में फांसी (Death Penalty)। BNS 103(2) में बहुचर्चित 'मॉब लिंचिंग' (Mob Lynching - भीड़ द्वारा हत्या) को भी स्पष्ट रूप से जोड़कर फांसी तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
तुलना
IPC की ऐतिहासिक धारा 302 की जगह अब BNS 103 ने ले ली है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि इसमें ‘Mob Lynching’ (भीड़ हत्या) के लिए अलग से सब-सेक्शन 103(2) जोड़ा गया है।