धारा 104 BNS VS धारा 303 IPC: आजीवन सिद्धदोष (Life-convict) द्वारा हत्या के लिए दंड

सजा (Punishment)

कठोर या सादा

संज्ञेय (Cognizable)

संज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

गैर-जमानती

समझौता योग्य (Compoundable

गैर-शमनीय

विचारणीय न्यायालय (Court)

सेशन कोर्ट

IPC (पुराना कानून)

धारा 303

जो कोई आजीवन कारावास के दंडादेश के अधीन होते हुए हत्या करेगा, वह मृत्यु (Death) से दंडित किया जाएगा। [Supreme Court struck this down in Mithu v. State of Punjab, 1983 as unconstitutional].

BNS (नया कानून)

धारा 104

जो कोई आजीवन कारावास (Life imprisonment) के दंडादेश के अधीन होते हुए हत्या करेगा, वह मृत्यु या आजीवन कारावास… से दंडित किया जाएगा।

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

उम्रकैदी द्वारा मर्डर! (Murder by Life Convict)। पुरानी IPC 303 में नियम था कि अगर कोई उम्रकैद काट रहा कैदी जेल में (या पैरोल पर) किसी और का मर्डर कर दे, तो उसे 'अनिवार्य रूप से (Mandatory)' फांसी दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने 1983 में इसे 'ग़ैर-संवैधानिक' बताकर रद्द कर दिया था। अब नए BNS 104 में इस गलती को सुधार लिया गया है—यदि उम्रकैदी मर्डर करता है, तो जज उसे महज़ फांसी नहीं, বরং हालात देखकर दूसरी 'उम्रकैद' या 'फांसी' दे सकता है।

तुलना

Mithu v. State of Punjab 1983 के ऐतिहासिक फैसले को BNS में समाहित (incorporate) कर लिया गया है। अनिवार्य मृत्युदंड (Mandatory Death Penalty) को हटा दिया गया है।

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