धारा 116 BNS VS धारा 320 IPC: घोर उपहति (Grievous hurt)

सजा (Punishment)

परिभाषा

संज्ञेय (Cognizable)

संज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

जमानती / गैर-जमानती (आधार पर)

समझौता योग्य (Compoundable

शमनीय (कुछ मामलों में)

विचारणीय न्यायालय (Court)

कोई भी मजिस्ट्रेट

IPC (पुराना कानून)

धारा 320

केवल निम्नलिखित किस्म की उपहतियां (Hurt) ही ‘घोर’ (Grievous) कहलाती हैं: 1. पुंसत्वहरण (Emasculation) 2. किसी नेत्र की दृष्टि का स्थायी विच्छेद… 7. हड्डी या दांत का टूटना 8. ऐसी उपहति जो जीवन को संकटापन्न करे या 20 दिन तक तीव्र शारीरिक पीड़ा दे।

BNS (नया कानून)

धारा 116

केवल निम्नलिखित किस्म की उपहतियां ही घोर उपहति (Grievous Hurt) कहलाती हैं… (8 clauses remain same as IPC + added 15 days rule). BNS reduces the ’20 days of severe bodily pain’ threshold to ’15 days’.

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

गंभीर चोट (Grievous Hurt) और 15 दिन का नया नियम! अगर किसी ने लाठी मारकर आपकी 'हड्डी/दांत तोड़ (Fracture)' दिया, या 'आंख फोड़' दी, या हमेशा के लिए किसी अंग को बेकार कर दिया; तो इसे 'घोर उपहति' (गंभीर चोट) कहते हैं। IPC 320 में एक नियम था कि यदि कोई 20 दिन तक अस्पताल में दर्द से पड़ा रहे तो वह 'घोर' चोट है। BNS 116 ने इस 20 दिन की अवधि को घटाकर '15 दिन (15 Days)' कर दिया है, ताकि पीड़ितों को जल्दी न्याय मिले।

तुलना

BNS में एक बहुत बड़ा बदलाव यह है कि Grievous Hurt की परिभाषा में ’20 दिन’ (20 Days severe bodily pain) की समयावधि को घटाकर 15 दिन कर दिया गया है।

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