धारा 122 BNS VS धारा 334 IPC: प्रकोपन (Provocation) पर स्वेच्छया उपहति कारित करना

सजा (Punishment)

कठोर या सादा

संज्ञेय (Cognizable)

असंज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

जमानती

समझौता योग्य (Compoundable

शमनीय (Compoundable)

विचारणीय न्यायालय (Court)

कोई भी मजिस्ट्रेट

IPC (पुराना कानून)

धारा 334

जो कोई गंभीर और अचानक प्रकोपन (Grave and sudden provocation) पर स्वेच्छया उपहति कारित करेगा… (1 मास या ₹500)।

BNS (नया कानून)

धारा 122

122: जो कोई गंभीर और अचानक प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहति कारित करेगा… (1 मास या जुर्माना जो ₹5000 तक हो सकेगा)।

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

अचानक आई भयंकर गालियों से भड़क कर मारना! (Provocation Hurt)। अगर कोई आदमी अचानक 'A' की मां-बहन को भद्दी गालियां देने लगे (Grave Propocation), और 'A' अपना आपा खोकर (Out of sudden anger) उसे थप्पड़ जड़ दे। यहाँ कानून मानता है कि 'A' ने पहले से प्लानिंग नहीं की थी, बल्कि वह उकसावे में आ गया था। इसे BNS 122 (IPC 334) कहते हैं, जिसमें IPC 323 (1 साल) की तुलना में सिर्फ 1 महीने नाम-मात्र की सजा या जुर्माना होता है।

तुलना

उकसावे (Provocation) में आकर की गई साधारण मारपीट। BNS में जुर्माना 500 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये किया गया है।

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