धारा 127(1) BNS VS धारा 340 IPC: सदोष परिरोध (Wrongful confinement)

सजा (Punishment)

परिभाषा

संज्ञेय (Cognizable)

संज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

जमानती

समझौता योग्य (Compoundable

शमनीय

विचारणीय न्यायालय (Court)

कोई भी मजिस्ट्रेट

IPC (पुराना कानून)

धारा 340

जो कोई किसी व्यक्ति को सदोष अवरोध इस प्रकार करता है कि उस व्यक्ति को निश्चित परिसीमा (Certain circumscribing limits) के परे जाने से निवारित कर दे… वह ‘सदोष परिरोध (Wrongful Confinement)’ कारित करता है।

BNS (नया कानून)

धारा 127(1)

127(1): जो कोई किसी व्यक्ति को सदोष अवरोध इस प्रकार करता है कि उस व्यक्ति को निश्चित परिसीमा के परे जाने से निवारित कर दे… वह सदोष परिरोध कारित करता है।

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

कमरे में बंद करके ताला लगाना! (Wrongful Confinement)। सदोष अवरोध (339) में आप सिर्फ सीधा नहीं जा सकते, पर पीछे मुड़ सकते हैं। लेकिन 'सदोष परिरोध (Wrongful Confinement)' का मतलब है 'बंधक बनाना'। यदि कोई आपको एक कमरे में ले जाकर बाहर से ताला लगा दे, तो आप 'किसी भी दिशा (All directions)' में नहीं जा सकते। यह एक गंभीर अपराध (Hostage situation जैसी) है, जिसे BNS 127(1) (पुराना IPC 340) में परिभाषित किया गया है।

तुलना

यह ‘बंधक बनाने’ या ‘नज़रबंद’ (House arrest / Confinement) करने की कानूनी परिभाषा है।

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