धारा 199 BNS VS धारा 166A IPC: लोक सेवक जो विधि के अधीन निदेश की अवज्ञा करता है (FIR दर्ज न करना आदि)

सजा (Punishment)

कठोर (Rigorous Imprisonment)

संज्ञेय (Cognizable)

संज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

जमानती

समझौता योग्य (Compoundable

गैर-शमनीय

विचारणीय न्यायालय (Court)

प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट

IPC (पुराना कानून)

धारा 166A

जो कोई लोक सेवक: (a) किसी व्यक्ति की उपस्थिति की अपेक्षा करने वाले निदेश की अवज्ञा करेगा (CrPC 160)। (b) महिलाओं से पूछताछ (CrPC 161) के नियम तोड़ेगा। (c) यदि वह धारा 326A, 376 (बलात्कार) आदि गंभीर अपराधों की FIR दर्ज करने में विफल रहता है… तो उसे 6 माह से 2 वर्ष तक का कठोर कारावास होगा।

BNS (नया कानून)

धारा 199

जो कोई लोक सेवक… यदि वह एसिड अटैक, बलात्कार (पुराने 376, नए BNS सेक्सुअल अपराध), यौन उत्पीड़न आदि की FIR दर्ज करने में विफल रहता है… तो उसे 6 माह से 2 वर्ष तक का कठोर कारावास होगा।

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

यह कानून का सबसे ताकतवर हथियार है! विशेषकर महिलाओं के लिए। निर्भया कांड (2013) के बाद IPC 166A लाई गई थी। अब BNS 199 के तहत यदि कोई पुलिस अधिकारी रेप, छेड़छाड़ या एसिड अटैक जैसे मामलों की 'FIR दर्ज करने से मना करता है' या टालमटोल करता है, तो उस पुलिस अधिकारी को 2 साल तक की जेल हो सकती है (जिसमें कम से कम 6 महीने तो काटने ही होंगे)।

तुलना

FIR दर्ज करने से मना करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एक कठोर ‘हथियार’।

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