धारा 200 BNS VS धारा 166B IPC: पीड़िता का उपचार न करने के लिए दंड

सजा (Punishment)

सादा

संज्ञेय (Cognizable)

संज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

जमानती

समझौता योग्य (Compoundable

गैर-शमनीय

विचारणीय न्यायालय (Court)

प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट

IPC (पुराना कानून)

धारा 166B

जो कोई, चाहे वह सरकारी अस्पताल हो या प्राइवेट… उसका भारसाधक (In-charge) होते हुए… CrPC की धारा 357C का उल्लंघन करेगा (बलात्कार या एसिड अटैक पीड़िता का मुफ़्त और तुरंत इलाज न करना)… 1 वर्ष कारावास।

BNS (नया कानून)

धारा 200

जो कोई अस्पताल का भारसाधक (चाहे सरकारी या प्राइवेट) BNSS (पुरानी CrPC) के प्रावधानों के तहत एसिड अटैक या रेप पीड़िता का मुफ़्त चिकित्सा उपचार (Medical treatment) करने से इंकार करेगा… 1 वर्ष का कारावास।

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

कोई भी प्राइवेट (Private) अस्पताल अब दुर्घटना, एसिड अटैक या रेप के मामलों में यह कहकर मरीज को लौटा नहीं सकता कि 'यह पुलिस केस है, हम इलाज नहीं करेंगे'। BNS 200 (IPC 166B) के तहत अस्पताल के चीफ या डॉक्टर को इलाज न करने के जुर्म में 1 साल की जेल हो सकती है। 'इलाज पहला अधिकार है, पुलिस इंक्वायरी बाद में।'

तुलना

अस्पतालों (निजी सहित) की कानूनी जवाबदेही (Liability for non-treatment)।

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