धारा 217 BNS VS धारा 182 IPC: लोक सेवक को अपनी विधिपूर्ण शक्ति (Lawful power) का उपयोग दूसरे व्यक्ति को क्षति पहुंचाने के लिए करने के आशय से झूठी सूचना देना
सजा (Punishment)
साधारण
संज्ञेय (Cognizable)
असंज्ञेय
जमानतीय (Bailable)
जमानती
समझौता योग्य (Compoundable
गैर-शमनीय
विचारणीय न्यायालय (Court)
कोई भी मजिस्ट्रेट
IPC (पुराना कानून)
धारा 182
जो कोई किसी लोक सेवक को झूठी सूचना इसलिए देता है… कि वह लोक सेवक अपने अधिकारों का प्रयोग करके किसी तीसरे व्यक्ति को तंग या परेशान करे (जैसे झूठी शिकायत करना)… (6 मास)।
BNS (नया कानून)
धारा 217
जो कोई किसी लोक सेवक को झूठी सूचना इसलिए देता है… कि वह लोक सेवक अपने अधिकारों का प्रयोग करके किसी तीसरे व्यक्ति को क्षतिकारित करे या क्षोभ पहुंचाए… (6 मास की जेल या ₹10k जुर्माना)।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
यह धारा 'झूठी शिकायत' (False Complaint) वालों के लिए है। यदि आप अपने पड़ोसी से दुश्मनी निकालने के लिए पुलिस में झूठा फोन (100 नंबर) करते हैं कि 'उसके घर में ड्रग्स है', ताकि पुलिस उसे परेशान करे। बाद में जांच में शिकायत झूठी निकली, तो पुलिस उलटा आपके खिलाफ BNS 217 (IPC 182) का 'कलंदरा' काट देगी (6 महीने जेल)।
तुलना
झूठी शिकायतें रोकने के लिए पुलिस द्वारा प्रयुक्त होने वाली सबसे सामान्य धारा। जुर्माना बढ़ाया गया है।