धारा 223 BNS VS धारा 188 IPC: लोक सेवक द्वारा विधिवत प्रख्यापित आदेश (Promulgated Order) की अवज्ञा
सजा (Punishment)
साधारण
संज्ञेय (Cognizable)
संज्ञेय
जमानतीय (Bailable)
जमानती
समझौता योग्य (Compoundable
गैर-शमनीय
विचारणीय न्यायालय (Court)
कोई भी मजिस्ट्रेट
IPC (पुराना कानून)
धारा 188
जो कोई लोक सेवक द्वारा दिए गए आदेश (जैसे धारा 144 CrPC) की अवज्ञा करेगा, जिससे क्षोभ या क्षति उत्पन्न हो (1 मास)… यदि अवज्ञा से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो या बलवा हो (6 मास)।
BNS (नया कानून)
धारा 223
जो कोई लोक सेवक द्वारा प्रख्यापित आदेश (Promulgated Order) की अवज्ञा करेगा… यदि उस कारण से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को खतरा या बलवा हो… (6 मास या ₹5000 जुर्माना)।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
कोविड-19 (Lockdown) के दौरान भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली धारा! जब भी कलेक्टर/मजिस्ट्रेट शहर में धारा 144 लगाते हैं या कोई सरकारी आदेश निकालते हैं (जैसे- मुंह पर मास्क लगाएं, रात 10 बजे के बाद DJ बंद करें), तो उस 'आदेश को न मानना' BNS 223 (IPC 188) का अपराध है (6 महीने जेल)।
तुलना
सरकारी आदेशों (Public Orders) के पालन के लिए आधारभूत कानून।