धारा 230 BNS VS धारा 194 IPC: मृत्यु से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना

सजा (Punishment)

कठोरतम

संज्ञेय (Cognizable)

असंज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

गैर-जमानती

समझौता योग्य (Compoundable

गैर-शमनीय

विचारणीय न्यायालय (Court)

सेशन कोर्ट

IPC (पुराना कानून)

धारा 194

जो कोई… इस इरादे से झूठे साक्ष्य देगा/गढ़ेगा कि किसी व्यक्ति को भारत में मृत्यु (Death/Capital Punishment) से दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराया जाए… वह आजीवन कारावास (या 10 वर्ष) से दंडित होगा। यदि उस झूठे साक्ष्य के कारण किसी निर्दोष को ‘फांसी’ हो जाए… तो झूठ बोलने वाले को भी मृत्युदंड/फांसी (Death) दी जाएगी।

BNS (नया कानून)

धारा 230

जो कोई झूठा साक्ष्य देगा ताकि किसी व्यक्ति को मृत्युदंड से दंडनीय अपराध के लिए सजा हो जाए… वह आजीवन कारावास (या 10 वर्ष) से दंडित होगा। यदि किसी निर्दोष व्यक्ति को उसके कारण फांसी दी जाती है… तो झूठे साक्ष्य देने वाले को भी मृत्युदंड (Death) की सजा दी जाएगी।

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

'आंख के बदले आंख' (Tit for Tat) का न्यायिक उदाहरण! यदि आप किसी निर्दोष व्यक्ति को 'हत्या' के झूठे केस में फंसाने के लिए कोर्ट में फर्जी सबूत पेश करते हैं, और आपके उस झूठे सबूत की वजह से जज उस निर्दोष बेचारे को 'फांसी (Death Penalty)' दे देता है; तो फांसी के बाद जब आपका झूठ पकड़ा जाएगा, तो BNS 230 (IPC 194) के तहत आपको (झूठे गवाह को) भी अदालत फांसी पर लटका देगी!

तुलना

अत्यंत दुर्लभ और अत्यंत कठोर प्रावधान। झूठी गवाही से हत्या (Judicial murder) करने वाले को भी मृत्युदंड।

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