धारा 242 BNS VS धारा 205 IPC: वाद (Suit) या अभियोजन (Prosecution) में कपटपूर्ण कार्य के प्रयोजन से मिथ्या प्रतिरूपण (False personation)
सजा (Punishment)
कठोर या सादा
संज्ञेय (Cognizable)
असंज्ञेय
जमानतीय (Bailable)
जमानती
समझौता योग्य (Compoundable
गैर-शमनीय
विचारणीय न्यायालय (Court)
प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
IPC (पुराना कानून)
धारा 205
जो कोई साशय किसी वाद या कार्यवाही में किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण कर लेगा (Personating another) और कोई स्वीकृति या बयान देगा… (3 वर्ष)।
BNS (नया कानून)
धारा 242
जो कोई साशय किसी वाद या कार्यवाही में किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण कर लेगा और कोई स्वीकृति या बयान देगा… (3 वर्ष और ₹10000 जुर्माना)।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
कोर्ट में 'फर्जी गवाह/मुजरिम' बनकर खड़ा होना! कई बार जमानत दिलाने (Bail) के लिए या गवाही देने के लिए, 'रामू' की जगह 'श्यामू' फर्जी पहचान पत्र लगाकर कोर्ट में खड़ा हो जाता है। ऐसे अदालती धोखाधड़ी (Impersonation in court) के लिए BNS 242 (IPC 205) में सीधे 3 साल की सजा होती है।
तुलना
न्यायिक प्रक्रिया में पहचान की धोखाधड़ी (Identity fraud)।