धारा 249 BNS VS धारा 212 IPC: अपराधी को संश्रय (Harbouring offender)
सजा (Punishment)
विभिन्न प्रकार
संज्ञेय (Cognizable)
अपराध के अनुसार
जमानतीय (Bailable)
जमानती
समझौता योग्य (Compoundable
गैर-शमनीय
विचारणीय न्यायालय (Court)
प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
IPC (पुराना कानून)
धारा 212
जो कोई यह जानते हुए कि किसी ने अपराध किया है, उस अपराधी को कानूनी दंड से बचाने के इरादे से ‘छिपाएगा’ (Harbour)… मृत्यु से दंडनीय अपराध में (5 वर्ष), आजीवन में (3 वर्ष)। अपवाद – पति/पत्नी द्वारा एक दूसरे को छिपाना।
BNS (नया कानून)
धारा 249
जो कोई यह जानते हुए कि अपराध किया गया है, उस अपराधी को बचाने के इरादे से ‘संश्रय’ (Harbour) देगा… (मृत्यु दंड वाले में 5 वर्ष, उम्रकैद में 3 वर्ष)। अपवाद: पति या पत्नी को आपस में छिपाने की छूट।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
मुजरिम को पनाह देना! यदि कोई हत्यारा भागकर आपके घर आता है और आप जानते हुए भी कि उसने खून किया है, उसे खाना और छिपने की जगह (Harbour) देते हैं, तो BNS 249 (IPC 212) के तहत आपको 5 साल तक की जेल मिलेगी। **अपवाद (Exception):** भारतीय कानून (और अब BNS भी) पति और पत्नी को एक-दूसरे को छिपाने के लिए सजा नहीं देता (Marital shield)।
तुलना
अपराधियों को आश्रय देना। पत्नी/पति का अपवाद कायम है।