धारा 253 BNS VS धारा 216 IPC: ऐसे अपराधी को संश्रय देना (Harbouring) जो अभिरक्षा (Custody) से निकल भागा है

सजा (Punishment)

कठोर या सादा

संज्ञेय (Cognizable)

संज्ञेय/असंज्ञेय (अपराध अनुसार)

जमानतीय (Bailable)

जमानती

समझौता योग्य (Compoundable

गैर-शमनीय

विचारणीय न्यायालय (Court)

प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट

IPC (पुराना कानून)

धारा 216

जब कोई अपराधी जो ‘वैध पुलिस कस्टडी’ से भाग गया है, या जिसकी गिरफ्तारी के आदेश (Warrant) निकल चुके हैं… उसे यह जानते हुए घर में छिपाना (Harbour करना)… (मृत्यु वाले मामले में 7 वर्ष)। अपवाद – पति/पत्नी।

BNS (नया कानून)

धारा 253

जब कोई अपराधी जो वैध पुलिस कस्टडी से भाग गया है… उसे यह जानते हुए छिपाना… (मृत्यु दंड वाले मामले में 7 वर्ष, आजीवन में 3 वर्ष)। अपवाद – पति/पत्नी।

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

IPC 212 आम अपराधी को छिपाने के लिए है (5 साल सजा), जबकि BNS 253 (IPC 216) उस मुजरिम को छिपाने के लिए है जो पुलिस 'कस्टडी' से जेल तोड़कर भागा है या जिसका वारंट निकल चुका है। पुलिस से भागे हुए को पनाह देना और भी सख़्त अपराध है (7 साल सजा)।

तुलना

पुलिस हिरासत से भागे हुए (Escaped from Custody) विचाराधीन कैदियों/मुजरिमों को पनाह देना।

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