धारा 255 BNS VS धारा 217 IPC: लोक सेवक जो किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति को समपहरण (Forfeiture) से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा करता है
सजा (Punishment)
कठोर या सादा
संज्ञेय (Cognizable)
असंज्ञेय
जमानतीय (Bailable)
जमानती
समझौता योग्य (Compoundable
गैर-शमनीय
विचारणीय न्यायालय (Court)
कोई भी मजिस्ट्रेट
IPC (पुराना कानून)
धारा 217
जो कोई लोक सेवक… इस इरादे से कि किसी व्यक्ति को सजा से बचाया जाए… विधि के निदेशों की ‘अवज्ञा’ (Disobey) करेगा… (2 वर्ष)।
BNS (नया कानून)
धारा 255
जो कोई लोक सेवक… इस इरादे से कि किसी व्यक्ति को सजा से बचाया जाए… विधि के निदेशों की अवज्ञा करेगा… (2 वर्ष या जुर्माना)।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम! यदि पुलिस इंस्पेक्टर किसी रसूखदार मर्डरर को बचाने के लिए जानबूझकर कानून के खिलाफ जाकर उसकी फाइल कमजोर कर दे (यानी ड्यूटी की अवज्ञा करे), तो उस इंस्पेक्टर को BNS 255 (IPC 217) के तहत 2 साल की जेल हो सकती है।
तुलना
मुजरिमों को बचाने के लिए सरकारी तंत्र (Police/Officials) के दुरूपयोग पर सजा।