धारा 257-258 BNS VS धारा 219-220 IPC: न्यायिक कार्यवाही में लोक सेवक द्वारा भ्रष्टाचारपूर्ण रिपोर्ट आदि (Corrupt report/order) / प्राधिकार वाले व्यक्ति द्वारा किसी को विचारण (Trial) या परिरोध (Confinement) के लिए सुपुर्द करना
सजा (Punishment)
कठोर या सादा
संज्ञेय (Cognizable)
असंज्ञेय
जमानतीय (Bailable)
जमानती
समझौता योग्य (Compoundable
गैर-शमनीय
विचारणीय न्यायालय (Court)
प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
IPC (पुराना कानून)
धारा 219-220
219: लोक सेवक का न्यायिक कार्यवाही में भ्रष्टाचारपूर्वक ऐसी रिपोर्ट/आदेश देना जो वह जानता है कि विधि के प्रतिकूल है (7 वर्ष)। 220: अधिकारी द्वारा विधि के प्रतिकूल किसी को जेल भेजना (Commit for trial/confinement) भ्रष्टाचारपूर्वक (7 वर्ष)।
BNS (नया कानून)
धारा 257-258
257: लोक सेवक का न्यायिक कार्यवाही में भ्रष्टाचारपूर्वक विधि के प्रतिकूल रिपोर्ट देना (7 वर्ष)। 258: प्राधिकार वाले व्यक्ति (मजिस्ट्रेट/पुलिस) द्वारा विधि के प्रतिकूल किसी को परिरोध (Confinement) में सुपुर्द करना (7 वर्ष)।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
जजों और पुलिस कप्तानों के लिए क़ानून! यह न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी धारा है। यदि कोई जज घूस खाकर गलत फैसला (Judgment) दे दे (BNS 257) या कोई पुलिस अफसर निजी दुश्मनी में किसी बेगुनाह को 'अवैध रूप से जेल (Confinement)' भेज दे (BNS 258) तो इस 'न्यायिक भ्रष्टाचार' के लिए उन्हें 7 साल तक की जेल हो सकती है।
तुलना
यह कानून सुनिश्चित करता है कि अधिकारी/न्यायाधीश (Judges/Magistrates/Police) अपनी शक्तियों का उपयोग द्वेषपूर्ण (Maliciously) तरीके से न करें।