धारा 260-261 BNS VS धारा 222-223 IPC: दंडादेशाधीन व्यक्ति को पकड़ने में साशय लोप (222) / उपेक्षा द्वारा भागने देना (223)

सजा (Punishment)

विभिन्न प्रकार

संज्ञेय (Cognizable)

संज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

जमानती (223) / गैर-जमानती (222)

समझौता योग्य (Compoundable

गैर-शमनीय

विचारणीय न्यायालय (Court)

सेशन कोर्ट/प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट

IPC (पुराना कानून)

धारा 222-223

222: जो कोर्ट द्वारा ‘सजायाफ्ता’ (Convicted) कैदी है, उसे भागने देना या साशय न पकड़ना (आजीवन कारावास तक, यदि अपराधी मौत की सजा पाए हो)। 223: लोक सेवक की ‘उपेक्षा’ (लापरवाही/Negligence) के कारण कैदी का भागना (2 वर्ष)।

BNS (नया कानून)

धारा 260-261

260: सजायाफ्ता कैदी को भागने देना (आजीवन/15 वर्ष/7 वर्ष)। 261: लोक सेवक की उपेक्षा (लापरवाही) के कारण कैदी का अभिरक्षा (Custody) से निकल भागना (2 वर्ष)।

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

सजायाफ्ता कैदी (Convict) से जुड़े कानून! BNS 260 (IPC 222) उन पुलिसवालों के लिए है जो जानबूझकर 'सजा पाए' कैदी को भगाते हैं (सजा: उम्रकैद तक हो सकती है)। और BNS 261 (IPC 223) उन पुलिसवालों के लिए है जो जानबूझकर नहीं, बल्कि 'ड्यूटी पर सो जाने' या 'लापरवाही' के कारण कैदी को भागने देते हैं (सजा: 2 साल जेल)।

तुलना

Intentional escape (साशय भागने देना) और Negligent escape (लापरवाही से भागना) के बीच का अंतर सजा की गंभीरता तय करता है।

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