धारा 264 BNS VS धारा 227-228 IPC: दंड के परिहार (Remission) की शर्त का अतिक्रमण करना

सजा (Punishment)

मूल सजा बहाल

संज्ञेय (Cognizable)

संज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

गैर-जमानती

समझौता योग्य (Compoundable

गैर-शमनीय

विचारणीय न्यायालय (Court)

मूल न्यायालय

IPC (पुराना कानून)

धारा 227-228

227: जो कोई किसी ‘सजा माफ़ी’ (Remission of punishment) की शर्त का जानबूझकर उल्लंघन करेगा… उसे जो मूल सजा (Original Punishment) दी गई थी, वही भुगतनी पड़ेगी। 228: Intentional insult to public servant sitting in judicial proceeding.

BNS (नया कानून)

धारा 264

264: जो कोई ऐसे परिहार (Remission) की किसी शर्त का, जिस पर वह दंड निलंबित किया गया था, साशय अतिक्रमण करेगा… उसे मूल सजा पुनः दी जाएगी। (NOTE: IPC 228 is essentially covered under BNS 267).

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

सरकारों (राष्ट्रपति/राज्यपाल) द्वारा कई बार कैदियों की 'उम्रकैद' को शर्त पर माफ़ (Remission) कर दिया जाता है (जैसे कि वह कभी दोबारा जुर्म नहीं करेगा)। यदि वह छूटा हुआ कैदी फिर से बाहर आकर वह शर्त (Condition) तोड़ देता है, तो BNS 264 (IPC 227) के तहत उसकी 'माफ़ी' रद्द हो जाती है और उसे वापस जेल में डाल दिया जाता है।

तुलना

Conditional Release (सशर्त रिहाई) के नियमों का उल्लंघन।

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