धारा 265 BNS VS धारा 230-231 IPC: सिक्का (Coin) की परिभाषा और सिक्के का कूटकरण (Counterfeiting coin)

सजा (Punishment)

कठोर या सादा

संज्ञेय (Cognizable)

संज्ञेय (Cognizable)

जमानतीय (Bailable)

गैर-जमानती (Non-Bailable)

समझौता योग्य (Compoundable

गैर-शमनीय (Non-Compoundable)

विचारणीय न्यायालय (Court)

सेशन कोर्ट (Session Court) / प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट

IPC (पुराना कानून)

धारा 230-231

230: सिक्का वह धातु है जो समय-समय पर धन के रूप में उपयोग की जाती है… भारतीय सिक्का (Indian coin) भारत सरकार के प्राधिकार द्वारा जारी किया गया है। 231: जो कोई सिक्के का कूटकरण (Counterfeit) करेगा… 7 वर्ष की सजा।

BNS (नया कानून)

धारा 265

265: जो कोई सिक्के का कूटकरण (Counterfeit) करेगा… (भारतीय सिक्के के लिए आजीवन कारावास या 10 वर्ष, अन्य के लिए 7 वर्ष)। (BNS merges the definitions and penalties).

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

जाली सिक्के (Fake Coins) बनाना! BNS 265 (IPC 230/231) के तहत, यदि कोई व्यक्ति अपनी फैक्ट्री में भारत सरकार के 10 या 20 रुपये के 'जाली सिक्के' छापता/बनाता है, तो यह देश की इकॉनमी पर हमला है। इसके लिए 10 साल से लेकर 'उम्रकैद' (आजीवन कारावास) तक की कठोर सजा का प्रावधान है।

तुलना

BNS ने सिक्के की परिभाषा (230) और कूटकरण (231, 232) को एक ही धारा BNS 265 में समाहित कर दिया है।

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