धारा 266 BNS VS धारा 229A IPC: जमानत/बंधपत्र (Bail/Bond) पर छोड़े गए व्यक्ति द्वारा न्यायालय में उपस्थित होने में विफलता

सजा (Punishment)

कठोर या सादा

संज्ञेय (Cognizable)

संज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

गैर-जमानती

समझौता योग्य (Compoundable

गैर-शमनीय

विचारणीय न्यायालय (Court)

कोई भी मजिस्ट्रेट

IPC (पुराना कानून)

धारा 229A

जिस व्यक्ति को अपराध के लिए ‘जमानत’ (Bail) पर छोड़ा गया है, यदि वह बिना पर्याप्त कारण (Sufficient cause) के जमानत की शर्तों के अनुसार न्यायालय में तारीख पर पेश नहीं होता… (1 वर्ष का कारावास)।

BNS (नया कानून)

धारा 266

जो कोई अपराध के लिए जमानत (Bail) या बंधपत्र (Bond) पर छोड़ा गया है, पर्याप्त कारण के बिना न्यायालय में पेश होने में विफल रहेगा… (1 वर्ष का कारावास या जुर्माना)।

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

जमानत जब्त होना (Jumping Bail)! यदि कोर्ट ने आपको मर्डर या चोरी के केस में जमानत (Bail) दी है और कहा है कि 'हर महीने की 10 तारीख को पेश होना'। यदि आप बिना किसी गम्भीर कारण (बीमारी आदि) के तारीख पर पेश नहीं होते, तो आप 'जमानत फांदने (Bail jumping)' के अपराधी हो जाते हैं। इसके लिए BNS 266 (IPC 229A) के तहत अलग से 1 साल की सजा मिलती है।

तुलना

जमानत की शर्तों (Bail conditions) का उल्लंघन एक पृथक अपराध है।

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