धारा 3(5) BNS VS धारा 34 IPC: सामान्य आशय (Common Intention)
सजा (Punishment)
लागू नहीं (संयुक्त दायित्व सिद्धांत)
संज्ञेय (Cognizable)
मुख्य अपराध के अनुसार
जमानतीय (Bailable)
मुख्य अपराध के अनुसार
समझौता योग्य (Compoundable
मुख्य अपराध के अनुसार
विचारणीय न्यायालय (Court)
मुख्य अपराध के अनुसार
IPC (पुराना कानून)
धारा 34
जब कोई आपराधिक कार्य कई व्यक्तियों द्वारा सब के सामान्य आशय को अग्रसर करने में किया जाता है, तब ऐसे व्यक्तियों में से हर व्यक्ति उस कार्य के लिए उसी प्रकार दायित्व के अधीन है मानो वह कार्य अकेले उसी ने किया हो।
BNS (नया कानून)
धारा 3(5)
जब कोई आपराधिक कार्य कई व्यक्तियों द्वारा सब के सामान्य आशय को अग्रसर करने में किया जाता है, तब ऐसे व्यक्तियों में से हर व्यक्ति उस कार्य के लिए उसी प्रकार दायित्व के अधीन है मानो वह कार्य अकेले उसी ने किया हो।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
यह BNS की सबसे महत्वपूर्ण धाराओं में से एक है। IPC 34 अब BNS 3(5) है। यह संयुक्त देयता (Joint Liability) का सिद्धांत है जहाँ यदि कई लोग एक योजना के तहत अपराध करते हैं, तो सभी को समान रूप से दोषी माना जाता है।
तुलना
| IPC 34 | BNS 3(5) |
|---|---|
| सामान्य आशय के लिए संयुक्त दायित्व। | समान सिद्धांत BNS अध्याय II में सुरक्षित। |