धारा 303(1) BNS बनाम धारा 378 IPC: चोरी (Theft) की परिभाषा

सजा (Punishment)

परिभाषा

संज्ञेय (Cognizable)

संज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

गैर-जमानती

समझौता योग्य (Compoundable

गैर-शमनीय

विचारणीय न्यायालय (Court)

कोई भी मजिस्ट्रेट

IPC (पुराना कानून)

धारा 378

जो कोई किसी व्यक्ति के कब्जे (Possession) में से उस व्यक्ति की सम्मति (Consent) के बिना कोई जंगम संपत्ति (Movable property) बेईमानी से ले लेने (Dishonestly take) का आशय रखते हुए वह संपत्ति हटाता है (Moves), वह ‘चोरी (Theft)’ करता है, यह कहा जाता है।

BNS (नया कानून)

धारा 303(1)

303(1): जो कोई किसी व्यक्ति के कब्जे में से उस व्यक्ति की सम्मति के बिना कोई जंगम संपत्ति बेईमानी से ले लेने का आशय रखते हुए वह संपत्ति हटाता है, वह चोरी करता है, यह कहा जाता है।

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

चोरी (Theft) क्या है! (Definition of Theft)। मान लीजिए कि 'A' आपके घर आता है और आपकी मेज पर रखी घड़ी (Movable Property) को 'चुराने की नीयत' (Dishonest Intention) से चुपके से अपनी जेब में डाल लेता है (Move)। जैसे ही उसने उस घड़ी को उसकी जगह से 'हटाया', कानून की नज़र में उसकी 'चोरी' पूरी हो गई, भले ही वह अभी घर से बाहर न निकला हो। यह BNS 303(1) (पुरानी IPC 378) के तहत चोरी की सटीक कानूनी परिभाषा है।

तुलना

चोरी के 5 तत्व (Elements of Theft): 1. Dishonest Intention, 2. Movable property, 3. Out of possession of another, 4. Without consent, 5. Moving that property. BNS 303 में यह समान है।

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