धारा 309 BNS बनाम धारा 390 IPC: लूट (Robbery)

सजा (Punishment)

परिभाषा

संज्ञेय (Cognizable)

संज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

गैर-जमानती

समझौता योग्य (Compoundable

गैर-शमनीय

विचारणीय न्यायालय (Court)

प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट (सजा 392 में है)

IPC (पुराना कानून)

धारा 390

सब प्रकार की लूट (Robbery) में या तो चोरी (Theft) है या उद्यापन (Extortion) है। चोरी लूट कब है: यदि संपत्ति ले जाते समय, अपराधी मृत्यु या उपहति… तत्काल (Instant) कारित करता है या भय दिखाता है। उद्यापन लूट कब है: जब अपराधी भय में डाले गए व्यक्ति के सामने (Present) हो और तत्काल मृत्यु/उपहति का भय दिखाए।

BNS (नया कानून)

धारा 309(1), (2), (3)

309(1): सब प्रकार की लूट में या तो चोरी है या उद्यापन है। (2) चोरी लूट कब है… (3) उद्यापन लूट कब है… (Exact same meaning and text).

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

लूट (बन्दूक की नोंक पर चोरी)! (Robbery)। अगर कोई जेब काटे तो 'चोरी (Theft) है'। कोई फोन पर धमकी देकर पैसे मांगे तो 'एक्सटॉर्शन (Extortion)' है। लेकिन अगर कोई सड़क पर आपके 'सामने खड़ा होकर' आपकी कनपटी पर बंदूक रख दे और कहे 'निकाल जो कुछ है', (Instant Fear of Death), तो उसे कानून की भाषा में 'लूट (Robbery)' कहते हैं। लूट हमेशा चोरी या उद्यापन का ही ख़तरनाक (हिंसक) रूप होती है (BNS 309 / पुरानी IPC 390)।

तुलना

लूट (Robbery) के मूल तत्व—’तत्काल मृत्यु या चोट का भय’ (Instant fear of death or hurt)—BNS 309 में जस के तस रखे गए हैं।

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