धारा 321 BNS बनाम धारा 422 IPC: ऋणों (Debts) को लेनदारों के लिए उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना
सजा (Punishment)
कठोर या सादा
संज्ञेय (Cognizable)
असंज्ञेय
जमानतीय (Bailable)
जमानती
समझौता योग्य (Compoundable
शमनीय (अनुमति से)
विचारणीय न्यायालय (Court)
कोई भी मजिस्ट्रेट
IPC (पुराना कानून)
धारा 422
जो कोई किसी ऋण या मांग (Debt or demand) को जो स्वयं उसका है या किसी अन्य व्यक्ति का है… विधि के अनुसार उस व्यक्ति के लेनदारों के संदाय (Payment of creditors) के लिए उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक रोकता है (Prevents)… 2 वर्ष + जुर्माना।
BNS (नया कानून)
धारा 321
321: ऋणों को लेनदारों के लिए उपलब्ध होने से बेईमानी से निवारित करना… 2 वर्ष तक के कारावास या जुर्माना या दोनों।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
उगाही या कर्जे के पैसे को छिपाना! मान लीजिए 'A' ने 'B' से 10 लाख उधार लिए थे। अब कोर्ट ने कहा है कि 'A' के सारे पैसे ज़ब्त करके 'B' को दिए जाएं। इसी बीच 'C' (जिसने 'A' के पैसे देने थे) 'A' के साथ मिलकर यह 'झूठा' नाटक करता है कि उसने कोई पैसा 'A' को नहीं देना, और 'A' भी उस कर्ज (Debt) को छोड़ देने (Release) का नाटक करता है ताकि कोर्ट 'B' को वह पैसा न दिला सके। इस 'मिलीभगत वाली धोखाधड़ी' (Preventing debt) के लिए BNS 321 (IPC 422) में 2 साल की सजा है।
तुलना
संपत्ति के साथ-साथ ‘Debt’ (ऋण) को भी फर्जी रूप से ख़त्म (Fraudulent release of claim) करने को BNS 321 में दंडनीय अपराध रखा गया है।