धारा 332 BNS बनाम धारा 449-450 IPC: मृत्यु (Death) या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए गृह-अतिचार
सजा (Punishment)
आजीवन कारावास या कठोर/सादा 10 वर्ष
संज्ञेय (Cognizable)
संज्ञेय
जमानतीय (Bailable)
गैर-जमानती
समझौता योग्य (Compoundable
गैर-शमनीय
विचारणीय न्यायालय (Court)
सेशन कोर्ट
IPC (पुराना कानून)
धारा 449-450
449: मृत्यु दंड (Death penalty) से दंडनीय अपराध (जैसे हत्या) करने के आशय से गृह-अतिचार… (आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक सादा/कठोर कारावास)।
450: आजीवन कारावास (Life imprisonment) से दंडनीय अपराध करने के आशय से गृह-अतिचार… (10 वर्ष + जुर्माना)।
BNS (नया कानून)
धारा 332(a), 332(b)
BNS 332: गंभीर अपराधों के लिए गृह-अतिचार—(a) यदि अपराध मृत्यु से दंडनीय हो (आजीवन कारावास / 10 वर्ष)।
(b) यदि अपराध आजीवन कारावास से दंडनीय हो (10 वर्ष)।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
हत्या (Murder) के इरादे से घर में घुसना! (Aggravated House-Trespass)। अगर कोई व्यक्ति मात्र चोरी के लिए नहीं, बल्कि किसी की गोलियों से 'हत्या (Murder)' करने के पक्के इरादे से किसी के घर में घुसता है (IPC 449 / BNS 332-a)। तो घर में कदम रखते ही, भले ही उसने अभी तक हत्या न की हो, उस पर 10 साल की सजा या सीधे 'उम्रकैद' का गैर-जमानती केस बनता है। क्योंकि हत्या (मृत्यु दंडनीय अपराध) के इरादे से घर में घुसना सबसे 'खूंखार' अतिचार है।
तुलना
गंभीर अपराध (Murder/Rape) के Intent के साथ किया गया House-Trespass एक अलग अध्याय है। BNS 332 ने IPC 449/450/451 को एक ही धारा के उपखंडों (a, b, c) में समेकित (Consolidate) कर दिया है।