धारा 336(3) BNS बनाम धारा 464 IPC: मिथ्या दस्तावेज़ रचना (Making a false document)

सजा (Punishment)

परिभाषा

संज्ञेय (Cognizable)

असंज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

जमानती

समझौता योग्य (Compoundable

गैर-शमनीय

विचारणीय न्यायालय (Court)

कोई भी मजिस्ट्रेट

IPC (पुराना कानून)

धारा 464

यह कहा जाता है कि कोई व्यक्ति मिथ्या दस्तावेज़ (False document) रचता है—(पहला) जो बेईमानी से या कपटपूर्वक किसी ऐसे व्यक्ति के प्राधिकार (Authority) से किसी दस्तावेज़ को हस्ताक्षरित (Signs), सीलबंद या निष्पादित करता है… जिसके द्वारा वह नहीं किया गया है। (दूसरा) जो दस्तावेज़ में तात्विक परिवर्तन (Material alteration) करता है। (तीसरा) जो पागल/नशे में व्यक्ति से धोखे से साइन करवाता है।

BNS (नया कानून)

धारा 336(3)

336(3): (1) जो बेईमानी से या कपटपूर्वक… (Same 3 conditions for making a false document).

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

झूठा कागज़ कैसे बनता है? लॉ के अनुसार 3 तरीकों से 'दस्तावेज़ झूठा' (False Document) हो जाता है। (1) किसी दूसरे के साइन (Sign/Seal) खुद कर देना। (2) कागज़ में लिखी 10,000 की रकम को 1,00,000 बना देना (Alteration)। (3) किसी बुज़ुर्ग या नशे में धुत व्यक्ति से धोखे से वसीयत पर अंगूठा लगवा लेना (Deception)। इन सब को IPC 464 (BNS 336) में 'मिथ्या दस्तावेज़ (False Document)' बताया गया है जो कि 463 Forgery का आधार है।

तुलना

Forgery के लिए ‘False Document’ का होना ज़रूरी है। False document किन परिस्थितियों में बनता है, यह BNS 336 के स्पष्टीकरण (Explanations) में जस का तस रखा गया है।

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