धारा 35 BNS VS धारा 97 IPC: शरीर तथा संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार

सजा (Punishment)

साधारण अपवाद (आत्मरक्षा)

संज्ञेय (Cognizable)

लागू नहीं

जमानतीय (Bailable)

लागू नहीं

समझौता योग्य (Compoundable

लागू नहीं

विचारणीय न्यायालय (Court)

लागू नहीं

IPC (पुराना कानून)

धारा 97

हर व्यक्ति को अधिकार है कि वह (1) अपने शरीर और किसी अन्य व्यक्ति के शरीर की,… और (2) अपनी संपत्ति या किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति की प्रतिरक्षा करे (चोरी, लूट, रिष्टि या आपराधिक अतिचार के विरुद्ध)।

BNS (नया कानून)

धारा 35

हर व्यक्ति को अधिकार है कि वह (1) अपने शरीर और किसी अन्य व्यक्ति के शरीर की,… और (2) अपनी संपत्ति या किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति की प्रतिरक्षा करे।

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

BNS 35 स्पष्ट करती है कि आत्मरक्षा का अधिकार केवल 'स्वयं' तक सीमित नहीं है। आप सड़क पर पिट रहे किसी अजनबी (शरीर) या जल रहे किसी पड़ोसी के घर (संपत्ति) को बचाने के लिए भी बल प्रयोग कर सकते हैं।

तुलना

आत्मरक्षा स्वार्थपरक नहीं है, यह सामाजिक दायित्व भी है कि आप दूसरों को भी बचा सकते हैं।

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