धारा 351 BNS बनाम धारा 503/506 IPC: आपराधिक अभित्रास (Criminal intimidation) व दंड
सजा (Punishment)
कठोर या सादा
संज्ञेय (Cognizable)
सामान्य में असंज्ञेय / 7 वर्ष वाली धमकी में संज्ञेय
जमानतीय (Bailable)
जमानती (अधिकतर राज्यों में)
समझौता योग्य (Compoundable
शमनीय
विचारणीय न्यायालय (Court)
कोई भी मजिस्ट्रेट / प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
IPC (पुराना कानून)
धारा 503, 506
BNS (नया कानून)
धारा 351(1), 351(2), 351(3)
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
'तुझे जान से मार दूंगा' जैसी धमकियां देना! (Criminal Intimidation)। अगर कोई गुंडा आपको रास्ते में रोककर कहता है: 'अगर तूने कंप्लेंट वापस नहीं ली तो मैं तेरी टांगे तोड़ दूंगा' (Physical/Property Threat)। इस तरह 'डराने-धमकाने' को कानून में आपराधिक अभित्रास कहा जाता है (IPC 506 / BNS 351)। अगर कोई हल्की-फुल्की धमकी दे तो 2 साल की सज़ा (जमानती) है। लेकिन अगर वो फोन पर 'जान से मारने' (Death threat) या 'घर में आग लगाने' की गंभीर धमकी दे, तो उस पर BNS 351(3) के अनुसार 7 साल की कड़ी सजा हो सकती है।
तुलना
IPC 506 (धमकी) भारत के थानों में सबसे अधिक दर्ज होने वाली धाराओं में से है। अब यह BNS 351(2) बन गई है। Death Threats (मृत्यु की धमकी) के लिए BNS 351(3) में 7 वर्ष का कड़ा दंड पूर्ववत सुरक्षित है।