धारा 36 BNS VS धारा 98 IPC: विकृतचित्त आदि व्यक्ति के कार्य के विरुद्ध प्रायवेट प्रतिरक्षा

सजा (Punishment)

साधारण अपवाद

संज्ञेय (Cognizable)

लागू नहीं

जमानतीय (Bailable)

लागू नहीं

समझौता योग्य (Compoundable

लागू नहीं

विचारणीय न्यायालय (Court)

लागू नहीं

IPC (पुराना कानून)

धारा 98

जब कोई कार्य… पागलपन, नशे या शिशु होने के कारण अपराध नहीं है, तब भी हर व्यक्ति को उस कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का वही अधिकार है, जो वह अन्यथा रखता।

BNS (नया कानून)

धारा 36

जब कोई कार्य… पागलपन, नशे या शिशु होने के कारण अपराध नहीं है, तब भी हर व्यक्ति को उस कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का वही अधिकार है, जो वह अन्यथा रखता।

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

भले ही कोई 'पागल' व्यक्ति हत्या का प्रयास करे (और वह कानूनन निर्दोष हो), फिर भी आपको उसे गोली मारने या रोकने का पूरा अधिकार (Self Defense) है। BNS 36 सुनिश्चित करता है कि हमलावर के पागल होने से आपकी आत्मरक्षा का अधिकार खत्म नहीं होता।

तुलना

कानून कहता है कि आप पागल के हाथों मरने के लिए विवश नहीं हैं।

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