धारा 37 BNS VS धारा 99 IPC: ऐसे कार्य जिनके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है
सजा (Punishment)
अपवादों की सीमा
संज्ञेय (Cognizable)
लागू नहीं
जमानतीय (Bailable)
लागू नहीं
समझौता योग्य (Compoundable
लागू नहीं
विचारणीय न्यायालय (Court)
लागू नहीं
IPC (पुराना कानून)
धारा 99
(1) लोक सेवक द्वारा सद्भावपूर्वक किए गए कार्य (जब मृत्यु/घोर उपहति का खतरा न हो), (2) राज्य प्राधिकारियों की सहायता प्राप्त करने का समय हो, (3) सुरक्षा के लिए जितना बल आवश्यक हो, उससे अधिक बल का प्रयोग नहीं।
BNS (नया कानून)
धारा 37
(1) लोक सेवक द्वारा सद्भावपूर्वक किए गए कार्य (जब मृत्यु/घोर उपहति का खतरा न हो), (2) राज्य प्राधिकारियों की सहायता प्राप्त करने का समय हो, (3) सुरक्षा के लिए जितना बल आवश्यक हो, उससे अधिक बल का प्रयोग।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
आत्मरक्षा के अधिकार की 3 बड़ी सीमाएँ (Restrictions): 1. आप वैध पुलिस अधिकारी को नहीं पीट सकते 2. यदि पुलिस को बुलाने का समय है, तो खुद कानून हाथ में न लें 3. केवल उतना ही बल प्रयोग करें (Proportional Force) जितना बचने के लिए जरूरी हो (छड़ी के हमले पर एके-47 से फायर न करें)।
तुलना
BNS 37 (IPC 99) आत्मरक्षा (Self Defense) पर सबसे महत्वपूर्ण अंकुश (Limit) लगाता है, ताकि इसका दुरुपयोग हत्या के बहाने के रूप में न हो।