धारा 41 BNS VS धारा 103 IPC: संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार मृत्यु कारित करने तक कब विस्तारित होता है
सजा (Punishment)
साधारण अपवाद (संपत्ति रक्षा)
संज्ञेय (Cognizable)
लागू नहीं
जमानतीय (Bailable)
लागू नहीं
समझौता योग्य (Compoundable
लागू नहीं
विचारणीय न्यायालय (Court)
लागू नहीं
IPC (पुराना कानून)
धारा 103
संपत्ति की रक्षा में निम्न 4 स्थितियों में मृत्यु कारित की जा सकती है: 1. लूट (Robbery), 2. रात्रौ गृह-भेदन (House-breaking by night), 3. अग्नि द्वारा रिष्टि (घर/तम्बू जलाना), 4. चोरी, रिष्टि या गृह-अतिचार जहाँ मृत्यु/घोर उपहति की आशंका हो।
BNS (नया कानून)
धारा 41
संपत्ति की रक्षा में निम्न 4 स्थितियों में मृत्यु कारित की जा सकती है: 1. लूट, 2. रात्रौ गृह-भेदन, 3. अग्नि द्वारा रिष्टि (घर या संपत्ति को आग लगाना), 4. चोरी, रिष्टि या गृह-अतिचार जहाँ मृत्यु की आशंका हो।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
BNS 41 (IPC 103) स्पष्ट करता है कि आप केवल 'संपत्ति' बचाने के लिए किसी को जान से नहीं मार सकते, अंटिल मामला डकैती/लूट का हो, रात में घर तोड़ने (ताला तोड़ने) का हो, या आगजनी का हो। साधारण पॉकेटমার (Pickpocket) को जान से नहीं मारा जा सकता।
तुलना
संपत्ति के मामले में केवल गंभीर अपराधों (जैसे लूट या आगजनी) में ही जान से मारने का बचाव मिलता है।