धारा 42/43 BNS VS धारा 104/105 IPC: संपत्ति से भिन्न अपहानि और अधिकार का प्रारंभ
सजा (Punishment)
साधारण अपवाद
संज्ञेय (Cognizable)
लागू नहीं
जमानतीय (Bailable)
लागू नहीं
समझौता योग्य (Compoundable
लागू नहीं
विचारणीय न्यायालय (Court)
लागू नहीं
IPC (पुराना कानून)
धारा 104-105
यदि अपराध लूट या रात्रौ गृह-भेदन नहीं है तो मृत्यु कारित नहीं की जा सकती। संपत्ति का अधिकार तब शुरू होता है जब खतरे की आशंका हो, और तब तक रहता है जब तक चोरी का माल वापस न मिल जाए या अपराधी पुलिस तक न पहुंच जाए।
BNS (नया कानून)
धारा 42 & 43
यदि अपराध (धारा 41 में वर्णित से) अलग है, तो मृत्यु से भिन्न अपहानि की जा सकती है। अधिकार संपत्ति के खतरे तक या पुलिस के पहुंचने तक बना रहता है।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
यदि कोई दिन में आपके बगीचे से आम चुरा रहा है, तो आप उसे डंडे से भगा सकते हैं, लेकिन गोली नहीं मार सकते (BNS 42)। इसके अलावा, जब तक पुलिस न आ जाए या संपत्ति वापस न मिल जाए, तब तक पीछा करने या बल प्रयोग का अधिकार रहता है (BNS 43)।
तुलना
BNS 43 (IPC 105) स्पष्ट करता है कि चोरी के तुरंत बाद पीछा करते हुए रक्षा की जा सकती है।