धारा 45 BNS VS धारा 108 IPC: दुष्प्रेरक (Abettor)
सजा (Punishment)
परिभाषा
संज्ञेय (Cognizable)
मुख्य अपराध के अनुसार
जमानतीय (Bailable)
मुख्य अपराध के अनुसार
समझौता योग्य (Compoundable
मुख्य अपराध के अनुसार
विचारणीय न्यायालय (Court)
मुख्य अपराध के अनुसार
IPC (पुराना कानून)
धारा 108
वह व्यक्ति अपराध का दुष्प्रेरण करता है, जो अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण करता है, या ऐसे कार्य के किए जाने का दुष्प्रेरण करता है जो अपराध होता… (भले ही उकसाया गया व्यक्ति पागल हो या कार्य न करे)।
BNS (नया कानून)
धारा 45
वह व्यक्ति अपराध का दुष्प्रेरण करता है, जो अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण करता है, या ऐसे कार्य के किए जाने का दुष्प्रेरण करता है जो अपराध होता…।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
IPC 108 को BNS में अलग से न रखकर BNS 45 के स्पष्टीकरणों (Explanations) में समाहित किया गया है। यदि आप किसी पागल या बच्चे को हत्या के लिए उकसाते हैं, तो चाहे उसे (पागल होने के कारण) निर्दोष मान लिया जाए, लेकिन आपको 'हत्या के लिए उकसाने' की सजा जरूर मिलेगी।
तुलना
दुष्प्रेरक कौन है? इसका उत्तर अब BNS की धारा 45 के अंतर्गत ही स्पष्ट किया गया है।