धारा 47 BNS VS धारा 109 IPC: दुष्प्रेरण का दंड यदि दुष्प्रेरित कार्य उसके परिणामस्वरूप किया जाए
सजा (Punishment)
समान दंड
संज्ञेय (Cognizable)
मुख्य अपराध के अनुसार
जमानतीय (Bailable)
मुख्य अपराध के अनुसार
समझौता योग्य (Compoundable
मुख्य अपराध के अनुसार
विचारणीय न्यायालय (Court)
मुख्य अपराध के अनुसार
IPC (पुराना कानून)
धारा 109
जो कोई किसी अपराध का दुष्प्रेरण करता है, यदि दुष्प्रेरित कार्य उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया जाता है और ऐसे दुष्प्रेरण के दंड के लिए इस संहिता में कोई स्पष्ट उपबंध नहीं है… तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित दंड से दंडित किया जाएगा।
BNS (नया कानून)
धारा 47
जो कोई किसी अपराध का दुष्प्रेरण करता है, यदि दुष्प्रेरित कार्य उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया जाता है और ऐसे दुष्प्रेरण के दंड के लिए इस संहिता में कोई स्पष्ट उपबंध नहीं है… तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित दंड से दंडित किया जाएगा।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
BNS 47 सबसे महत्वपूर्ण दंड धाराओं में से एक है। यदि आप A को उकसाते हैं कि वह B की हत्या कर दे और A हत्या कर देता है। तो A को हत्या (फांसी/उम्रकैद) मिलेगी, और आपको भी 'BNS 47' के तहत हत्या की ही पूरी सजा मिलेगी क्योंकि आपके उकसाने के कारण कृत्य हुआ।
तुलना
दुष्प्रेरक (मास्टरमाइंड) को मुख्य अपराधी के बराबर ही सजा देने का सिद्धांत BNS में बरकरार है।