धारा 51 BNS VS धारा 113 IPC: दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो
सजा (Punishment)
भिन्न प्रभाव का दायित्व
संज्ञेय (Cognizable)
मुख्य अपराध के अनुसार
जमानतीय (Bailable)
मुख्य अपराध के अनुसार
समझौता योग्य (Compoundable
मुख्य अपराध के अनुसार
विचारणीय न्यायालय (Court)
मुख्य अपराध के अनुसार
IPC (पुराना कानून)
धारा 113
जब कोई कार्य… किसी विशिष्ट प्रभाव को कारित करने के आशय से दुष्प्रेरित किया जाए… और भिन्न प्रभाव कारित हो जाए (जैसे घोर उपहति के लिए उकसाया और मृत्यु हो गई)… तो दुष्प्रेरक उस भिन्न प्रभाव के लिए भी दायी है बशर्ते वह जानता था कि ऐसा प्रभाव संभाव्य था।
BNS (नया कानून)
धारा 51
जब कोई कार्य… किसी विशिष्ट प्रभाव को कारित करने के आशय से दुष्प्रेरित किया जाए… और भिन्न प्रभाव कारित हो जाए… तो दुष्प्रेरक उस भिन्न प्रभाव के लिए भी दायी है बशर्ते वह जानता था कि ऐसा प्रभाव संभाव्य था।
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
BNS 51 (पहले IPC 113) के तहत यदि A ने B को 'Z की हड्डी तोड़ने' (घोर उपहति) के लिए उकसाया, और उस हड्डी टूटने से Z की 'मौत' हो गई। चूंकि A जानता था कि इतनी मार से मौत हो सकती है, तो A पर सीधे हत्या (Murder) का मुकदमा चलेगा।
तुलना
निश्चित ज्ञान के आधार पर विस्तारित आपराधिक दायित्व।