धारा 53 BNS VS धारा 115 IPC: मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध का दुष्प्रेरण यदि अपराध न किया जाए

सजा (Punishment)

कठोर या सादा

संज्ञेय (Cognizable)

संज्ञेय

जमानतीय (Bailable)

गैर-जमानती

समझौता योग्य (Compoundable

गैर-शमनीय

विचारणीय न्यायालय (Court)

प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट / सत्र न्यायालय

IPC (पुराना कानून)

धारा 115

जो कोई मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध का दुष्प्रेरण करेगा… यदि वह अपराध उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप न किया जाए… तो उसे 7 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने की सजा होगी; और यदि अपहानि कर दी जाए, तो 14 वर्ष तक की सजा।

BNS (नया कानून)

धारा 53

जो कोई मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध का दुष्प्रेरण करेगा… यदि वह अपराध न किया जाए… तो उसे 7 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने की सजा होगी; और यदि अपहानि कर दी जाए, तो 14 वर्ष तक की सजा।

विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)

BNS 53 यह स्पष्ट करती है कि 'उकसाना' भी अपने आप में एक बड़ा अपराध है। यदि आपने किसी को हत्या करने के लिए सुपारी दी, लकिन उसने हत्या नहीं की। फिर भी आपको 'हत्या के लिए उकसाने' के जुर्म में 7 साल जेल (या चोट लगने पर 14 साल) की सजा होगी।

तुलना

योजना बनाने और हत्या के लिए उकसाने का कृत्य अपने आप में 7-14 साल की सजा का हकदार है।

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