धारा 62 BNS बनाम धारा 511 IPC: आजीवन कारावास या अन्य कारावास से दंडनीय अपराधों को करने के प्रयत्न (Attempt) के लिए दंड
सजा (Punishment)
मूल सजा का आधा
संज्ञेय (Cognizable)
मूल अपराध के अनुसार (संज्ञेय/असंज्ञेय)
जमानतीय (Bailable)
मूल अपराध के अनुसार (जमानती/गैर-जमानती)
समझौता योग्य (Compoundable
मूल अपराध के अनुसार
विचारणीय न्यायालय (Court)
मूल अपराध के अनुसार
IPC (पुराना कानून)
धारा 511
BNS (नया कानून)
धारा 62
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
क्राइम की 'कोशिश (Attempt)' करने की सामान्य धारा! (Punishment for Attempts)। भारतीय दंड संहिता का यह अंतिम और बहुत महत्वपूर्ण सेक्शन है। मान लीजिए 'A' ने 'B' के घर का ताला चोरी करने के लिए तोड़ा और अंदर गया, लेकिन अंदर 'एक रुपया' भी नहीं मिला (Attempt to commit theft)। अब चोरी की धारा (379/10 वर्ष) तो लग नहीं सकती क्योंकि चोरी 'पूरी' नहीं हुई। ऐसे 'अधूरे अपराधों (Attempts)' पर IPC 511 (नया BNS 62) लगती है। यह नियम है कि 'अपराध पूर्ण' होने पर जो सजा मिलती है, उसकी 'आधी सज़ा (Half Punishment)' (जैसे 10 साल का आधा 5 साल) उसकी 'कोशिश' करने वाले को दी जाएगी।
तुलना
जिन अपराधों की ‘कोशिश (Attempt)’ की अलग से धारा नहीं है (जैसे Attempt to Murder-307 अलग से है), उनके लिए यह जनरल प्रावधान (General Clause) काम आता है। IPC की अंतिम धारा 511 अब BNS के शुरू में Chapter II (punishments/general) में BNS 62 के रूप में मौजूद है।