धारा 82 BNS बनाम धारा 494 IPC: पति या पत्नी के जीवनकाल में पुनः विवाह (Bigamy)
सजा (Punishment)
कठोर या सादा
संज्ञेय (Cognizable)
असंज्ञेय (Non-cognizable)
जमानतीय (Bailable)
जमानती (Bailable)
समझौता योग्य (Compoundable
शमनीय (पत्नी/पति की सहमति+कोर्ट की अनुमति से)
विचारणीय न्यायालय (Court)
प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
IPC (पुराना कानून)
धारा 494
जो कोई पति या पत्नी के जीवित रहते हुए (Having a husband or wife living)… किसी ऐसी दशा में विवाह करेगा जिसमें ऐसा विवाह इस कारण शून्य (Void) है… वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि 7 वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से दंडित।
BNS (नया कानून)
धारा 82
82: जो कोई पति या पत्नी के जीवित रहते हुए विवाह करेगा (Bigamy)… वह 7 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दंडित। (Exception: 7 years missing continuously).
विशेषज्ञ टिप्पणी (Expert Analysis)
पहली पत्नी/पति के होते हुए दूसरी शादी (Bigamy)! अगर कोई हिंदू/ईसाई व्यक्ति (जिनके धर्म में दूसरी शादी शून्य/Void है) अपनी पहली पत्नी या पति के 'ज़िंदा रहते' (बिना कोर्ट से तलाक लिए) चुपके से किसी और से 'दूसरी शादी' कर लेता है। तो इसे कानून में 'द्विविवाह (Bigamy)' का अपराध (IPC 494 / BNS 82) माना जाता है। पहली पत्नी की कंप्लेंट पर ऐसे धोखेबाज़ पति को '7 साल' की जेल हो सकती है। (नोट: मुस्लिम पर्सनल लॉ में अपवाद है)।
तुलना
Bigamy (द्विविवाह) का अपराध, जो पहले Chapter XX में था, अब उसे ‘महिलाओं विरुद्ध अपराध’ की श्रेणी में BNS 82 पर लाया गया है। 7 वर्ष की सजा बरकरार है।